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एकता का पैगाम देने के लिए धरती पर आये गुरूनानक, गुरूनानक के आदर्शो पर चलने का आह्वान

Tue, 15 Nov 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Tue, 15 Nov 2016 12:03 AM IST
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Guru Nanak's message of unity should be follow

चन्द्रावती सीनीयर सैंकण्डरी स्कूल परिसर में सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी की जयंती का अयोन किया गया। इसके अलावा क्षेत्र में गुरूनानक जी का जन्मोउत्सव धूमधाम से मनाया गया। प्रधर्नाचार्य दयाराम ने विद्यालय के बच्चों को जानकारी देते हुए बताया की आज ही के दिन गुरु नानक देव का लाहौर में जन्म हुआ था। जिनके आदर्शो पर चलकर हमे सब धर्मो का समान करना चाहिए।

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उन्होंने कहा की वह एकता का पैगाम देने के लिए धरती पर आये। सच तो यह है कि समाज को संदेश देने वाले महापुरुषों सदैव अमर रहते  हैं। इसलिये गुरूनानक  जयंती को प्रकाशपर्व के रूप में ही मनाया जाना चाहिए, क्योंकि वह प्रकट होकर फिर अपने परमधाम चले जाते हैं और उनकी देह ही केवल जन्म लेकर मृत्यु को प्राप्त होती है जबकि वह स्वयं अपने भक्तों के हृदय और मस्तिष्क की धमनियों के स्मरण में सदैव जीवंत रहते हैं। उन्होंनेकहा की  श्री गुरुनानक देव जी ने स्वयं किसी धर्म की स्थापना नहीं की।
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उनके बाद आये गुरुओं ने अपने समय की स्थितियों को देखकर सिख पंथ की स्थापना भी भारतीय धर्म और संस्कृति कि रक्षा के लिये की थी। श्री गुरुनानक देव जी का जीवन सदैव समाज चिंतन और सुधार में बीता। बहुत कम लोग हैं जो आज के सय भारतीय समाज में उनकी भूमिका का सही आंकलन कर पाते हैं। भौतिक प्रवक्ता एंव शिक्षक देवेन्द्र मनोचा ने बताया  की एक बार गुरूनानक देवे को पढ़ाने के लिए उनके पिता ने उसे पड़ित के पास भेजा ,लेकिन नान देखकर पड़ित भी हैरान हो गया। 
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गुरूनाक ने विभिन्न धर्मगुरूओं से शिक्षा ग्रहण की। गुरूनानक जब अपनी भैंस चरा रहे थे, तो उनकी भैंस ने एक जमीदार का खैत उजाड़ दिया। जिसकी शिकायत जमीदार ने सरपंच से की। जब सरपंच खेत गए तो वहां कोई नुकसान नजर नहीं है। जिसे देकर जमीदार हैरान हो गया। उन्होंने बताया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की जयंती हम बाल दिवस के रूप में मनाते हैं। उसी तरह हमें भी अपने जीवन में ऐसे कार्य करने चाहिए, जिससे लोग हमें याद रखे। इस अवसर पर शिक्षिका सरस्वती शर्मा, काजोल मंगला, निशा, शिक्षक अजय व राजेश मौजूद थे। 

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