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फीस बढ़ोतरी पर सरकार की मंजूरी के मामले में स्कूलों को नहीं मिली राहत

Wed, 01 Jun 2016 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 01 Jun 2016 01:15 AM IST
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Fee hikes in schools, not the government's approval relief
कोर्ट, अदालत - फोटो : file photo

हाईकोर्ट ने एक बार फिर सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी से पहले दिल्ली सरकार की अनुमति लेने के मामले में राहत प्रदान करने से इंकार कर दिया। अदालत ने सभी स्कूलों को अपने खातों की पूरी जानकारी दिल्ली सरकार को देने का निर्देश दिया है।

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मुख्य न्यायधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंतनाथ की खंडपीठ के समक्ष स्कूलों की एसोसिएशन ने अपना लिखित पक्ष पेश किया। एसोसिएशन ने अदालत से आग्रह किया कि उनके द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका के निपटारे तक फीस बढ़ाने की इजाजत दी जाए। इसके अलावा सरकार को उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई से रोका जाए।
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दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने आपत्ति जाते हुए तय शर्तों में शामिल है कि स्कूल बिना सरकार की अनुमति से फीस नहीं बढ़ा सकते और स्कूलों के पास पर्याप्त फंड है। स्कूल प्रशासन अपने खातों की जानकारी नहीं दे रहे और जब तक खातों की जांच नहीं होती तब तक फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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एसोसिएशन के अधिवक्ता ने कहा कि वे खातों की जानकारी देने के लिए तैयार है और उन्हें राहत प्रदान की जाए। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने खातों की जानकारी देने के लिए समय बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। अदालत ने सभी स्कूलों को 31 जुलाई तक अपने खातों की पूरी डिटेल सरकार को देने का निर्देश दिया है। 

अदालत ने कहा कि खातों की जानकारी मिलने के बाद ही वे तय करेंगे कि फीस बढ़ोतरी की जरूरत है या नहीं। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर अदालत ने दो मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पेश मामले में ट्रांस यमुना पब्लिक स्कूल फेडरेशन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में हाई कोर्ट से विगत 19 जनवरी को फीस बढ़ाने से पहले शिक्षा विभाग की मंजूरी लेना अनिवार्य करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। 


8 अप्रैल को अदालत ने अपने फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था। याचिका में स्कूलों ने अपनी स्वायतत्ता का हवाला देकर कहा है कि भले ही स्कूल सरकारी जमीन पर है लेकिन लीज डीडी में इस तरह की शर्तों का कोई जिक्र नहीं है

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