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ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दाखिला न देने पर कोर्ट नाराज

Tue, 20 Sep 2016 12:12 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 20 Sep 2016 12:12 AM IST
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EWS category for admission to the court angry
कोर्ट - फोटो : file photo

हाईकोर्ट ने आदेश के बावजूद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) श्रेणी में कक्षा एक में बच्चे को दाखिला न देने पर निजी स्कूल के प्रति नाराजगी जताई है। 

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अदालत ने कहा कि आदेश के बावजूद आपने बच्चे को दाखिला क्यों नहीं दिया। आपको आदेश का पालन करना चाहिए था। मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने सिंगल जज के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान स्कूल के रवैये पर आपत्ति जताई। 
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खंडपीठ ने कहा कि यह कोर्ट का फैसला है और संविधान के तहत दिया गया है। आपको आदेश का पालन करना चाहिए था। आपने इसका पालन क्यों नहीं किया।

बता दें कि न्यायमूर्ति मनमोहन ने 26 अगस्त को सिद्धार्थ इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल को निर्देश दिया था कि दिव्यांग बच्चें को कक्षा एक में ईडब्ल्यूएस श्रेणी में दाखिला दिया जाए। 
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कोर्ट ने कहा था कि बच्चा कानूनी रूप से इस श्रेणी में निजी स्कूल में दाखिले का हकदार है। अदालत ने निजी स्कूल के उस तर्क को खारिज कर दिया कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी में कोटा नहीं है। 

कोर्ट ने बच्चे को दाखिला प्रदान करने का निर्देश देने संबंधी मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के निर्णय को खारिज कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि एमएसीटी को ऐसा आदेश देना अधिकार क्षेत्र में नहीं है।


स्कूल के तर्क
स्कूल के अधिवक्ता ने खंडपीठ के समक्ष तर्क रखा कि सिंगल जज ने भी एमएसीटी के फैसले को खारिज कर दिया था, फिर दाखिला क्यों। शिक्षा निदेशालय द्वारा स्कूल में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के अंतर्गत तय कोई सीट खाली नहीं है। बच्चे ने याचिका के लंबित होने के दौरान किसी अन्य स्कूल में दाखिला ले लिया है। खंडपीठ ने कहा कि वे सभी तथ्यों को देखने के बाद फैसला देंगे।

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