DUSU Election 2018: कालकाजी व देहात क्षेत्र के कॉलेज जिस पर होंगे मेहरबान, उसकी जीत हो जाएगी आसान
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डूसू चुनाव में कालकाजी व देहात क्षेत्र के कॉलेजों के वोटर किसी भी प्रत्याशी की जीत हार की राह तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। वैसे तो दिल्ली विश्वविद्यालय के 50 से अधिक कॉलेज डूसू से संबद्ध हैं, लेकिन इन क्षेत्रों के महज दर्जन भर ऐसे कॉलेज हैं जिनकी वोटिंग से यह तय हो जाता है कि किस संगठन का कौन सा प्रत्याशी जीत रहा है।
इन कॉलेजों में कैंपस कॉलेज व आउट ऑफ कैंपस कॉलेज शामिल हैं। जिसमें लगभग 1000 से ज्यादा छात्र वोट देते हैं। डूसू चुनाव में कालकाजी व देहात क्षेत्र में आने वाले कॉलेजों की वोटिंग से किसी भी उम्मीदवार का तख्ता पलट जाता है। इन क्षेत्रों में ज्यादातर ईवनिंग कॉलेज हैं, जहां जाट-गुर्जर जाति का दबदबा है। संगठन भी जाट-गुर्जर समीकरण को देखकर अपने पैनल तैयार करते हैं।
डूसू चुनाव के जानकारों के अनुसार भले ही जीत किसी भी संगठन का हो लेकिन हर प्रत्याशी व संगठन सबसे ज्यादा जोर इन्हीं कॉलेजों में लगाते हैं। कालकाजी क्षेत्र के देशबंधु कॉलेज, रामानुजन, कॉलेज ऑफ वोकेशनल स्टडी में तीन-चार हजार से अधिक वोटिंग होती है।
दिल्ली देहात के अदिति, श्रद्धानंद, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगिनी निवेदिता, शिवाजी कॉलेज में मतदान 2000 के आसपास रहता है। इसलिए माना जाता है कि इन कॉलेजों के मत अगर किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में गिर जाएं तो वह हर स्थिति में मुकाबले में बना रहता है। कुछ यही हाल पूर्वी दिल्ली के श्याम लाल कॉलेज का भी है। इस कॉलेज में भी मतदान का आंकड़ा 1200-1500 के आसपास रहता है।
कैंपस कॉलेजों की बात करें तो रामजस, हिंदू, हंसराज, किरोड़ीमल औरि सत्यवती कॉलेज भी जीत में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जबकि साउथ कैंपस के कॉलेजों में श्री वेंकटेश्वर, पीजीडीएवी, श्री अरबिंदो, आत्माराम सनातन धर्म निर्णायक कॉलेज माने जाते हैं। माना जाता है कि यदि इन दर्जनभर कॉलेज के मतदाता मेहरबान हों तो किसी भी प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित रहती है।