DUSU Election 2018 Result: ईवीएम में खराबी के बाद स्थगित मतगणना दुबारा होगी शुरू : अधिकारी
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दिल्ली विवि छात्र संघ चुनाव में हो रही मतगणना स्थगित कर दी गई थी। इसका कारण खराब ईवीएम बताया गया था। बता दें कि आज सुबह से ही मतगणना में कोई न कोई बाधा आ रही है। पहले तो मतगणना एक घंटे देर से शुरू हुई। यह सुबह 8:30 पर शुरू होनी थी लेकिन 9:30 से शुरू हुई। बताया जा रहा है कि पहले राउंड की मतगणना समाप्त होने के बाद एबीवीपी 2 सीटों पर और एनएसयूआई 2 सीट पर आगे चल रहे थे।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान ने कहा कि जब 8 उम्मीदवार ही मैदान में हैं तो ये कैसे संभव है कि 10 उम्मीदवारों के मतदान की गणना हो रही है। कल तक सभी मशीनें सही थी। इसमें पुलिस प्रशासन की मिली भगत है।
There are only 8 candidates, so how is it possible that votes were cast to a 10th candidate? All machines were fine yesterday. Police&administration are involved in this: Fairoz Khan, National President, NSUI on counting suspended after 6 EVMs stopped working in #DUSUElection2018 pic.twitter.com/kLqZumaLye
— ANI (@ANI) September 13, 2018
यहां यह उल्लेखनीय है कि एनएसयूआई अध्यक्ष पद और सचिव पद पर आगे चल रही थी। वहीं उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पद पर एबीवीपी आगे थी। हालांकि जितनी भी काउंटिंग हो चुकी है उसमें एबीवीपी और एनएसयूआई की कड़ी टक्कर बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार जब तक मतगणना हुई तब तक एनएसयूआई 3 सीटों पर आगे चल रही थी। मतगणना रोके जाने से एनएसयूआई के समर्थकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। ईवीएम में गड़बड़ी के चलते मतगणना रोक दी गई और संभावना है कि कल वोटिंग होगी।
बताया जा रहा है कि एक पद पर 8 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं मगर ईवीएम में गड़बड़ी के चलते 10 प्रत्याशी दिखाए गए।
वहीं कल रात जाकिर हुसैन कॉलेज यूनियन का परिणाम भी आ गया जिसमें एनएसयूआई को जीत हासिल हुई है। जाकिर हुसैन कॉलेज (ईवनिंग) में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज कर ली है।
एनएसयूआई ने 250 वोटों से जीता हासिल की। कॉलेज में सेंट्रल काउंसलर पद पर आईएसा के नबिया आलम ने बाजी मारी है। जाकिर हुसैन कॉलेज (मॉर्निंग) में बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया है।
आपको बता दें कि दिल्ली विवि छात्र संघ चुनाव के लिए बुधवार को मतदान हुआ था। ज्यादातर बूथों पर एनएसयूआई, एबीवीपी, सीवाईएसएस-आइसा के बीच त्रिकोणीय मुकाबला रहा।
इस साल सुबह की पाली में लगभग 43.8 फीसदी वोट पडे़। जो बीते साल से कम है। शाम की पाली में मतदान रात 7.30 बजे संपन्न हुआ। फिलहाल मतदान का आंकड़ा नहीं मिल पाया है। इस बार कुल मतदाताओं की संख्या 1.35 लाख थी।
दोनों पाली में मतदान औसतन 40-45 फीसदी के बीच रहा। तीन-चार कॉलेजों में ईवीएम में मामूली खराबी की शिकायत मिली थी लेकिन उसे ठीक कर लिया गया। पोलिंग स्टेशन पर सुबह 8.30 से वोटिंग शुरू हुई जो एक बजे तक चली।
शुरुआत में वोटिंग की रफ्तार कम थी लेकिन जैसे दिन चढ़ा इसमें तेजी देखी गई। सुबह 9.30 बजे तक 18.5 फीसदी व 11.30 बजे तक लगभग 34 फीसदी मतदान होने की सूचना थी।
नॉर्थ कैंपस के मिरांडा हाउस, केएमसी, हंसराज, रामजस, हिंदू व लॉ फैकल्टी में छात्रों की भीड़ रही। ऐसा ही कुछ हाल आउट ऑफ कैंपस कॉलेजों में रहा।
बीते सालों का मतदान प्रतिशत
वर्ष 2012 40.4
वर्ष 2013 43.38
वर्ष 2014 44.43
वर्ष 2015 43.30
वर्ष 2016 37.0
वर्ष 2017 42.8
किसकी होगी जीत, सबके अपने दावे
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव संपन्न होने के बाद बुधवार देर रात तक छात्र संगठनों के दिग्गज हार जीत को लेकर माथापच्ची करते दिखे। त्रिकोणीय मुकाबले में एबीवीपी व एनएसयूआई एक दूसरे को अपना प्रतिद्वंदी मान रही हैं।
वहीं, एबीवीपी चारों सीट पर जीत का दावा कर रही हैं तो एनएसयूआई तीन सीट मिलने की उम्मीद पाले हुए है। हालांकि दोनों गुटों में कुछ पदों को लेकर अनिश्चितता का माहौल देखने को मिला।
एबीवीपी का मानना है कि वह चारों सीट पर जीत रही है लेकिन सहसचिव पद पर उन्हें कांटे की टक्कर मिल रही है। उसे नॉर्थ कैंपस में अच्छी वोट मिलने का अनुमान है। जबकि साउथ कैंपस व आउटर कॉलेजों में एबीवीपी खुद को कमजोर मान रही है।
एबीवीपी को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सचिव पर जीत की पक्की उम्मीद है। एबीवीपी का कहना है कि कॉलेज यूनियन चुनाव के नतीजों में उन्हें बढ़त मिल रही है। लिहाजा डूसू चुनाव के चारों पद उसकी झोली में आएंगे।
इसी तरह, एनएसयूआई से जुड़े दिग्गजों की माने तो अध्यक्ष, सचिव व सहसचिव पद पर संगठन की जीत पक्की है। अध्यक्ष व सचिव पद के प्रत्याशियों ने काफी काम किया है। इसका लाभ उन्हें मिल सकता है। जबकि सहसचिव पद पर यादव वोट एनएसयूआई के खाते में आने का अंदेशा हैं।
एबीवीपी के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार विवादित होने के बावजूद जीत की उम्मीद बताई जा रही है। इस चुनाव में आइसा व सीवाईएसएस ने गठबंधन किया था। इसलिए एक सीट मिल सकती है।
हालांकि उनके उम्मीदवारों के कारण एनएसयूआई व एबीवीपी के कुछ वोट तो कटे हैं। आइसा-सीवाईएसएस की झोली में वोट जाने से नुकसान एनएसयूआई को होगा।