डूसू चुनावः सभी दलों ने जाट-गुर्जर, पिछड़ी जाति पर चला दांव, छात्राओं पर भी दिया ध्यान
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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में छात्र संगठनों ने एक बार फिर जाट-गुर्जर व पिछड़ी जाति पर दांव खेला है। ज्यादातर संगठनों ने अपने पैनल में जातिगत समीकरण का ध्यान रखा है। छात्राओं को टिकट देकर ग्लैमर की अनदेखी भी नहीं की गई। कट्टर प्रतिद्वद्वी एनएसयूआई और एबीवीपी ने हरियाणा और यूपी के वोटों मेें सेंध लगाने की भी कोशिश की है।
एनएसयूआई ने अपने पैनल में दो जाट, एक दलित व एक यादव प्रत्याशी को जगह दी है। अध्यक्ष पद के लिए हरियाणा बहादुरगढ़ के जाट प्रत्याशी सन्नी छिल्लर को टिकट दिया गया है। सन्नी का 2016 में भी नामांकन कराया गया था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। वह अध्यक्ष पद के टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे थे।
एनएसयूआई ने पहले अपने पैनल में उपाध्यक्ष पद के लिए आकाश चौधरी का नाम घोषित किया था, लेकिन बताया जा रहा है कि वह अध्यक्ष पद के लिए टिकट मांग रहे थे। बताया जा रहा है कि वह एबीवीपी के उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी के सामने चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे।
ऐसे में उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआई ने दिल्ली रोहिणी की लीना के रूप में दलित कार्ड चला। पहले लीना को सचिव पद पर उतारा जाना था। जाट समुदाय से आने वाले राजस्थान (बेहरोड) के आकाश चौधरी को सचिव पद का टिकट दिया गया। सहसचिव पर पर हरियाणा रेवाड़ी के सौरभ यादव के रूप में यादव कार्ड खेला है। इस समीकरण के कारण एनएसयूआई तीन सीटें जीतने का दावा कर रही है।
आपसी कलह भी दिखाई दी
बीते साल अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद गंवाने वाली एबीवीपी भी जाट-गुर्जर व ग्लैमर कार्ड खेलने में पीछे नहीं है। अध्यक्ष पद पर एबीवीपी ने गुर्जर समुदाय के कोटला मुबारकपुर के रहने वाले अंकिव बिसोया को मैदान में उतारा है। संगठन ने उपाध्यक्ष पद पर यूपी बलिया के राजपूत शक्ति सिंह को प्रत्याशी बनाया है।
वह राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग में कांस्य पदक जीत चुके हैं। सचिव पद पर एबीवीपी ने यमुनापार स्थित सभापुर गांव के सुधीर डेढ़ा को मैदान में उतारा है। वह गुर्जर समुदाय से आते हैं। सहसचिव पद पर जाट समुदाय की ज्योति चौधरी को टिकट दिया गया है।
वह दिल्ली की रहने वाली हैं। इसी तरह, सीवाईएसएस ने भी इन समीकरणों को ध्यान रखा है। सीवाईएसएस ने गुर्जर समुदाय के सन्नी तंवर को सचिव व सहसचिव पद पर ओबीसी प्रत्याशी चंद्रदेव मणि को मैदान में उतारा है।
आपसी कलह भी दिखाई दी
एबीवीपी में बीते दो साल से सुधीर डेढ़ा अध्यक्ष पद के लिए टिकट मांग रहे थे। उन्हें इस बार सचिव पद का टिकट दे दिया गया है। इस कारण वह खासे मायूस नजर आए। हालांकि एबीवीपी ने इस कलह को सामने नहीं आने दिया। वहीं एनएसयूआई में भी ऐसा ही देखने को मिला। दरअसल एनएसयूआई ने प्रज्ञा तोमर का नामांकन भी कराया था, लेकिन टिकट के समय लीना उन पर भारी पड़ गईं। बताया जा रहा है कि नाम वापसी के समय प्रज्ञा ने लीना का पर्चा फाड़ दिया था, लेकिन एनएसयूआई ने बातचीत कर उन्हें शांत करा दिया।