डीयू : नए कैंपस बनाने की शुरुआत, साउथ वेस्ट दिल्ली में शिफ्ट होगा स्कूल ऑफ लॉ
दिल्ली विश्वविद्यालय के तीन नए कैंपस बनाने की कवायद तेज हो गई है। तीन नए कैंपस साउथ वेस्ट दिल्ली (द्वारका), ईस्ट दिल्ली (कड़कड़डूमा) व वेस्ट दिल्ली में बनाए जाएंगे।
द्वारका में जमीन ले ली गई है और जल्द ही यहां कैंपस बनाने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस कैंपस में स्कूल ऑफ लॉ को शिफ्ट किया जाएगा। कुलपति प्रो. योगेश त्यागी ने अपनी पहली एकेडमिक काउंसिल बैठक में काउंसिल सदस्यों को इस बात की जानकारी दी। जल्द ही इन तीनों कैंपस को तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया जाएगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय की मंगलवार सुबह 11 बजे शुरू हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक दोपहर तीन बजे समाप्त हुई। काउंसिल सदस्य डॉ. आर.एन दुबे ने बताया कि इस बैठक में कुलपति ने सदस्यों को तीनों कैंपस के तैयार करने के विषय में जानकारी दी।
जहां कड़कड़डूमा में तैयार होने वाले कैंपस के लिए डीयू के पास पहले से ही जमीन है। यहां पर कुछ कोर्सेज को चलाने की तैयारी है। वहीं वेस्ट दिल्ली में जमीन तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डीयू से आरएमएल व सफदरजंग मेडिकल कॉलेज जुड़े
दिल्ली विश्वविद्यालय से देश के दो बड़े अस्पताल सदफरजंग अस्पताल के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज व राममनोहर लोहिया अस्पताल के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च अब डीयू से जुड़ गए हैं।
इस आशय का प्रस्ताव डीयू की एकेडमिक काउंसिल में लाया गया। एकेडमिक काउंसिल में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अभी तक यह दोनो ही मेडिकल कॉलेज दिल्ली सरकार की गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) से वर्ष 2008 से जुड़े थे।
कॉलेजों में शुरू होंगे वोकेशनल कोर्स
इन दो मेडिकल कॉलेजो के डीयू से जुड़ने के बाद डीयू के छह मेडिकल कॉलेज हो जाएंगे। एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ आर.एन दुबे ने बताया कि डीयू से जुड़ने के कारण अब यहां केवल 15 फीसदी सीटें ही दिल्ली के छात्रों के लिए होगी जबकि बाकी 85 फीसदी सीटें देशभर के छात्रों के लिए होगी।
अब तक आईपीयू से जुड़े होने के कारण यहां पचास फीसदी सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए थीं। चूंकि डीयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी है लिहाजा अब सेंट्रल यूनिवर्सिटी के नियम ही इन कॉलेजों में लागू होंगे।
इतिहास की किताबें हिंदी में उपलब्ध कराई जाएंगी
डीयू की एकेडमिक काउंसिल में इस बात पर चर्चा हुई कि इतिहास ऑनर्स व इतिहास प्रोग्राम की पुस्तकें हिंदी माध्यम में नहीं है। हिंदी में रेफरेंस पुस्तकें भी नहीं हैं।
जिसके कारण हिंदी माध्यम के छात्रों को कठिनाई होती है। इसे लेकर एसी सदस्यों ने विरोध जताया। एसी सदस्य डॉ आर.एन दुबे ने बताया कि बैठक में तय किया है कि अब इतिहास की हिंदी माध्यम में भी रेफरेंस बुक बनाई जाएंगी जिससे कि छात्रों को परेशानी न हो।
कॉलेजों में शुरू होंगे वोकेशनल कोर्स
एसी बैठक में बीए वोकेशनल हेल्थ केयर मैनेजमेंट व बीए वोकेशनल रिटेल मैनेजमेंट को जीसस एंड मैरी कॉलेज में, बीए वोकेशनल इन प्रिंटिंग टेक्नॉलॉजी को कालिंदी में, बीए वोकेशनल वेब डिजाइनिंग कालिंदी, बीए वोकेशनल बैकिंग एंड फाइनेंशियल एंड इंशयोरेंस सेक्टर रामानुजन कॉलेज में, बीए वोकेशनल आईटी रामानुजन, एडवांस डिप्लोमा इन टीवी प्रोग्राम एंड न्यूज प्रोडक्शन कोर्स को महाराजा अग्रसेन में शुरू करने की मंजूरी मिली है।
एसी सदस्य प्रो हंसराज सुमन ने बताया कि यह इसी सत्र से कॉलेजों में सेल्फ फाइनेंसिंग शुरू करने की इजाजत दी गई है। प्रत्येक कोर्स के लिए 50-50 सीटें होंगी और केन्द्र के निर्देशानुसार आरक्षण का प्रावधान होगा।