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डीयू स्टूडेंट ने खोजा ऐसा पौधा जो कर देता है कई गंभीर बीमारियों का इलाज

Wed, 26 Oct 2016 01:44 PM IST
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 26 Oct 2016 01:44 PM IST
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DU ramjas college students discovers plant which fights with many diseases
दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के छात्रों व शिक्षकों ने डायरिया, टीबी, बुखार, पीलिया, आंखों व त्वचा संबंधी बीमारियों से लड़ने वाले वनस्पति पौधों की खोज की है।

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यह ऐसे पौधे हैं, जिन्हें मणिपुर के आदिवासी बहुत पहले से कई प्रकार के उपचारों में इस्तेमाल करते आ रहे हैं। इन पौधों का रसायन बैक्टीरिया और वायरस से लड़ता है। शोध करने के बाद टीम ने पाया है कि इन रसायनों में कई तरह की बीमारियों से लड़ने की क्षमता है।
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रामजस कॉलेज के वनस्पति विभाग (बॉटनी) के शिक्षक डॉ. सुरेश कुमार के नेतृत्व में दस छात्रों व दो शिक्षकों डॉ. पुष्पलता व खलिल. एम एक इनोवेशन प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। डॉ. सुरेश ने बताया कि टीम मणिपुर के चंदेल जिले में गई।

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फलों, पत्तों, जड़ तक का इस्तेमाल

DU ramjas college students discovers plant which fights with many diseases
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वहां पांच गांवों का सर्वेक्षण कर अलग-अलग तरह की वनस्पतियों को एकत्र किया गया। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय के पारंपरिक वैद्य ने उन्हें बताया कि वे इन वनस्पतियों का बहुत पहले से चिकित्सा कार्यों में इस्तेमाल करते आ रहे हैं।

डॉ. सुरेश ने बताया कि कॉलेज की प्रयोगशाला में इन वनस्पतियों पर शोध किया गया। शोध में पता चला कि वनस्पतियों में कुछ विशेष प्रकार के रसायन है, जो विभिन्न प्रकार से बैक्टीरिया व वायरस से लड़ने की क्षमता रखते हैं।

मकसद, प्रमाणिकता सुनिश्चित करना
डॉ. सुरेश ने बताया कि शोध लगभग पूरा हो चुका है। इसकी रिपोर्ट नवंबर के शुरुआत में देनी है। उद्देश्य वनस्पतियों और पारंपरिक जड़ी-बूटियों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना है, ताकि इन्हें उपयोग में लाया जा सके।

फलों, पत्तों, जड़ तक का इस्तेमाल
शोध टीम के प्रमुख डॉ. सुरेश ने बताया कि कई ऐसे पौधे हैं जिनके फलों, पत्तों, जड़ों या पूरे पौधे का इस्तेमाल बीमारी के उपचार में किया जा सकता है। मसलन, आरटोकारपस लकूचा (बढ़ल) के फल का इस्तेमाल बुखार व त्वचा संबंधी बीमारियों में हो सकता है। 
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