फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   du college, students, new delhi

डीयू के कॉलेजों को अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा नहीं

Mon, 30 Jan 2017 12:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 30 Jan 2017 12:53 AM IST
विज्ञापन
du college, students, new delhi
demo pic - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं मिल सकता। चार कॉलेजों के बार-बार अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने की मांग को संसदीय समिति ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ये कॉलेज सरकारी ग्रांट से चलते हैं। सरकारी ग्रांट से चलने वाले कॉलेज को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं दिया जा सकता। हालांकि कॉलेजों के पास इसे लेकर न्यायालय जाने का रास्ता खुला है। 

विज्ञापन



दरअसल, डीयू के चार कॉलेज लंबे समय से यह मांग करते आ रहे हैं कि उन्हें अल्पसंख्यक संस्थान/कॉलेज का दर्जा दिया जाए, ताकि वे स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। पिछले कई वर्षों से कॉलेजों ने डीयू, यूजीसी, एमएचआरडी, एससी कमीशन में यह मुद्दा उठाया है। अब संसदीय समिति भी इस मुद्दे पर गंभीर दिखाई दे रही है। इसे लेकर दो-तीन बार संसदीय समिति की बैठक हो चुकी है। 
विज्ञापन



समिति का कहना है कि इन कॉलेजों को अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा नहीं दिया जा सकता, क्योंकि ये सरकारी अनुदान से संचालित होते हैं। सरकारी अनुदान प्राप्त संस्थाएं अपने से कोई मांग नहीं रख सकती हैं। इसलिए इस पर बहस करना बेमानी है। समिति का कहना है कि हालांकि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय में जाया जा सकता है, लेकिन इसी तरह के एक अन्य मामले में उस संस्था को अल्पसंख्यक का दर्जा देने से मना कर दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



डीयू एकेडमिक काउसिंल (एसी) के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि डीयू कॉलेजों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने संबंधी संसदीय समिति की मीटिंग में कई बार मुद्दा उठाया गया। हर बार यही कहा गया कि सरकार से अनुदान प्राप्त संस्थाओं को अल्पसंख्यक दर्जा नहीं दिया जा सकता।



उन्होंने बताया कि समिति ने कहा है कि जो कॉलेज आरक्षण नीति को नहीं अपना रहे और रोस्टर प्रणाली के नियमों को अनदेखा कर रहे हैं, उनके मामले में यूजीसी को आरक्षण लागू करने के नोडल अधिकारी होने के नाते उनके अनुदान बंद कर देने चाहिए। प्रो. सुमन का कहना है कि यूजीसी के रिकॉर्ड में यह कहीं नहीं लिखा गया है कि ये अल्पसंख्यक कॉलेज कहे जा सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed