DU ADMISSION 2018: लेना चाहते हैं रामजस कॉलेज में दाखिला, तो पहले जान लें इसकी खास बातें
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धीमी रफ्तार से ही सही पर रामजस कॉलेज ने अपनी एक अलग साख बनाई है। पढ़ाई के साथ सांस्कृतिक गतिविधियां व व्यवहारिक ज्ञान की इसकी पहल हमेशा अलग रहती है। डीयू के टॉप टेन कॉलेजों में शुमार रामजस कॉलेज ने बीते साल जनवरी 2017 में अपने 100 साल पूरे किए हैं। पुराना होने के साथ अपनी अलग पहचान बरकरार रखी है।
कॉलेज को मैथमेटिक्स, इकनॉमिक्स, हिस्ट्री, इंग्लिश, बॉटनी व जूलॉजी कोर्सेज के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यहां अंडरग्रेजुएट छात्रों के लिए रिसर्च सेंटर बनाया गया है। यहां छात्र व शिक्षक मिलकर नए विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा नॉलेज सेंटर पर ज्ञान लेने व देने का काम नए व पुराने छात्र करते हैं।
रामजस कॉलेज की स्थापना 1917 में दिल्ली के आनंद पर्वत से हुई। कॉलेज की शुरुआत काफी धीमी रही। लंबे समय तक कम छात्रों की सीमित संख्या के साथ कॉलेज चलता रहा। 1953 में नॉर्थ कैंपस शिफ्ट होने के बाद इसने अपनी अलग पहचान बनाई।
कॉलेज में खास
नॉलेज सेंटर, पुराने, नए व वर्तमान छात्र एक दूसरे से साझा करते हैं जानकारियां।
खेलकूद
शूटिंग, तीरंदाजी, जूडो, स्क्वैश, टेबल टेनिस और बॉस्केटबाल।
लैग्वेंज कोर्सेज
फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, इटालियन और चाइनीज
कॉलेज का सफर
1917 में आनंद पर्वत में कॉलेज की स्थापना हुई।
1953 में नॉर्थ कैंपस में कॉलेज हुआ शिफ्ट।
कॉलेज में सुविधाएं
18 कोर्स चलाए जा रहे हैं।
900 सीटें हैं कॉलेज में।
200 कमरे हैं हॉस्टल में।
120 हॉस्टल की सीटें लड़कों के लिए।
80 हॉस्टल की सीटें लड़कियों के लिए।
कॉलेज में पढ़ चुकीं मशहूर हस्तियां
प्रकाश झा, फिल्म निर्देशक
शेखर सुमन, टीवी कलाकार और एंकर
मनोज वाजपेयी, अभिनेता