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कोटे के विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र जांचने की मांग

Thu, 13 Jul 2017 09:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 13 Jul 2017 09:52 AM IST
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demands for students caste certificate verification who claim quota
students - फोटो : google

दिल्ली विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2017-18 के लिए स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिले का दौर जारी है। जल्द ही एमफिल, पीएचडी के लिए भी दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह प्रक्रिया 31 अगस्त तक पूरी हो जाएगी। इस दौरान कोटे के विद्यार्थियों की ओर से जमा किए गए प्रमाण पत्रों की जांच की मांग भी उठने लगी है। इस संबंध में एकेडमिक काउंसिल सदस्य ने एससी-एसटी, ओबीसी कोटे के विद्यार्थियों के जाति प्रमाण-पत्रों की जांच के लिए वाइस चांसलर को पत्र लिखा है।  

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दरअसल बीते वर्षों में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिला पाने वाले विद्यार्थियों पर लगाम लगाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। दिल्ली यूनिवर्सिटी एससी, एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम के चेयरमैन और एकेडेमिक काउंसिल सदस्य प्रो हंसराज सुमन ने वाइस चांसलर को पत्र लिखा है। 
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पत्र में मांग की है कि बीते पांच वर्षों में एससी ,एसटी और ओबीसी आरक्षण के आधार पर जिन छात्रों ने अंडर ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, एमफिल, पीएचडी, सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स के अलावा हॉस्टल में आरक्षित श्रेणी के आधार पर एडमिशन लिया है उनके जाति प्रमाण पत्रों की जांच संबंधित राज्यों में बने कार्यालयों के उच्चाधिकारियों से कराई जाए। 
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उन्होंने कहा कि जब से दिल्ली यूनिवर्सिटी में एससी, एसटी का केंद्रीयकृत प्रणाली के आधार पर पंजीकरण बंद हुआ है तब से कुछ कॉलेजों में गत वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं। लिहाजा फर्जी प्रणाम पत्र रोकने के लिए एडमिशन की प्रक्रिया पूरी होने पर 31 अगस्त के बाद इनकी जांच कराई जाए। 

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