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अब कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक भी एमफिल व पीएचडी रिसर्च करा सकेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 23 Jun 2017 09:42 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली विश्वविद्यालय में 20 जून से शुरू हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक बृहस्पतिवार को भी जारी रही। इस बैठक में एमफिल व पीएचडी के अध्यादेश 6 बी को पास कर दिया गया है। इस तरह से एमफिल-पीएचडी कर चुके शिक्षकों का रिसर्च कराने के लिए सुपरवाइजर बनना आसान हो गया है। इसके साथ ही एमफिल पूरा कर चुके शिक्षकों को पीएचडी कोर्स वर्क से भी छूट मिल गई है। हालांकि बीते दो दिनों से स्कूल ऑफ जर्नलिज्म को शुरू करने के प्रस्ताव पर लंबी बहस जारी है। खबर लिखे जाने तक एकेडमिक काउंसिल की बैठक जारी थी।
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एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि बुधवार देर रात 1.30 बजे बैठक स्थगित की गई। जिसके बाद महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा केलिए बृहस्पतिवार सुबह 11.30 बजे बैठक बुलाई गई। इस बैठक में एमफिल व पीएचडी केलिए नए रेगुलेशन को मंजूरी दी गई। अब तक सुपरवाइजर बनने के लिए प्रावधान होता था कि शिक्षक केपास तीन साल का कोई प्रमुख प्रोजेक्ट होना चाहिए। अब इसे वापस ले लिया गया है। नए प्रावधान केअनुसार जिन्होंने अपना एमफिल पूरा कर लिया उन्हें पीएचडी कोर्स वर्क करने से छूट होगी। वहीं अब शिक्षक दो साल की स्टडी लीव लिए बिना ही पीएचडी में दाखिला ले सकेगा। एडहॉक(तदर्थ) शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी क्योंकि उन्हें अपनी नौकरी छोड़कर पीएचडी करने की आवश्यकता नहीं होगी। नौकरी के साथ-साथ वह पीएचडी कर सकेंगे।
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स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में छात्रों को स्कॉलरशिप की सुविधा
एकेडमिक काउंसिल सदस्य डॉ पंकज गर्ग ने बताया कि स्कूल ऑफ जर्नलिज्म पर लगातार बहस जारी है। सदस्यों ने इस कोर्स केसंबंध में अपनी-अपनी बात रखी है। जिस पर कुलपति ने कहा कि यह इस कोर्स को करने में आर्थिक तंगी आड़े नहीं आएगी। इसमें छात्रों को स्कॉलरशिप दिए जाने की सुविधा दी जाएगी। डीयू प्रशासन ने जर्नलिज्म कोर्स के लिए 30 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर का प्रस्ताव तैयार किया है। डॉ गर्ग ने बताया कि कुलपति ने इस कोर्स की फीस को लेकर कोई समस्या हो तो कमेटी बनाने की बात कही है।
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