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बिहार के 12वीं के रिजल्ट से घटेंगे इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले
संदीप वर्मा/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Wed, 14 Jun 2017 09:25 AM IST
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बिहार में 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 35 फीसदी आने से केवल बिहार की शिक्षा में ही बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है, बल्कि इंजीनियरिंग शिक्षा के हब ग्रेटर नोएडा के 90 फीसदी से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों की कमर भी टूट सकती है।
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ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों में प्रत्येक वर्ष करीब 50 फीसदी विद्यार्थी बिहार-झारखंड से आते हैं। दूसरी तरफ, एकेटीयू के प्रबंधन कोटे में भी 60 फीसदी से अधिक अंक के नियम से कॉलेजों में 30 फीसदी तक दाखिले कम हो सकते हैं।
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अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग परीक्षा परिणाम आने के बाद एक ओर जहां कॉलेजों में दाखिले की कवायद शुरू हो गई है, वहीं 15 जून से काउंसलिंग के जरिये सीटें भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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ग्रेटर नोएडा में एकेटीयू से संबद्ध करीब 48 कॉलेजों में इंजीनियरिंग की लगभग 18 हजार सीटें हैं। इनमें से करीब छह से सात नामी कॉलेजों में काउंसिलिंग से 70 फीसदी तक सीटें भर जाती हैं। बाकी सीटें प्रबंधन कोटे से भरती हैं।
वहीं, बाकी बचे 30 से अधिक कॉलेजों में काउंसलिंग के बाद बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह जाती हैं। पिछले कुछ वर्षों में कॉलेजों में प्रबंधन कोटे से बड़ी संख्या में दाखिले होते हैं। इसमें से एक अनुमान के मुताबिक, करीब 50 फीसदी तक सीटों पर बिहार और झारखंड के छात्र दाखिला लेते हैं।
इसके बाद भी कॉलेजों में 40 फीसदी तक सीटें खाली रह जाती हैं। अब एकेटीयू के 60 फीसदी से कम अंक पाने वाले छात्रों को इंजीनियरिंग में दाखिला न मिलने के नए नियम से इन कॉलेजों को सीटें भरने में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। वहीं, बिहार में 12वीं बोर्ड परीक्षा में 35 फीसदी ही परिणाम आया है। इनमें से 60 फीसदी अंक वाले छात्रों का प्रतिशत भी कम है। ऐसे में ग्रेटर नोएडा के इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला लेने वालों की संख्या काफी घट सकती है।
30 फीसदी सीटों पर पड़ सकता है असर
एकेटीयू के 60 फीसदी से कम अंक पर दाखिला नहीं देने के नियम और बिहार 12वीं बोर्ड परीक्षा में बेहद कम पास प्रतिशत से ग्रेटर नोएडा के कॉलेजों को करीब 30 फीसदी तक सीटें भरने में मुश्किल होगी। इसके लिए यूपी सरकार से नियमों में ढील कर पात्रता के लिए 50 फीसदी अंक करने की मांग की गई है। बिहार सरकार भी दो विषयों में ग्रेस मार्क दे सकती है, जिससे स्थित में सुधार हो सकेगा।- मनोज अग्रवाल, निदेशक स्काईलाइन कॉलेज
अच्छे कॉलेजों पर नहीं पड़ेगा असर
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने वाले कॉलेजों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। इन कॉलेजों में काउंसलिंग से ही अधिकतर सीटें भर जाती हैं। बिहार में सख्त मूल्यांकन से 35 फीसदी पास परिणाम आने और एकेटीयू के 60 फीसदी से अधिक अंक पर दाखिला वाले नियम से शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ेगी।- राजीव अग्रवाल, निदेशक जीएल बजाज कॉलेज
पीजीडीएम समेत अन्य कोर्स की ओर जाएंगे छात्र
इंजीनियरिंग की सीटों पर दाखिले के लिए केवल बिहार ही नहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उड़ीसा और अन्य प्रदेशों से भी छात्र आते हैं। इंजीनियरिंग में दाखिला कम होने पर छात्र पीजीडीएम, एमबीए आदि कोर्स की ओर जाएंगे। हालांकि, कुछ फीसदी नुकसान कॉलेजों को उठाना पड़ सकता है।- हरीश कुमार, प्रोफेसर एक्यूरेट कॉलेज