स्कूलों में प्रवेश से पहले होगी आंखों की जांच
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बच्चों की लगातार कमजोर हो रही आंखों को लेकर दिल्ली सरकार बड़ा बदलाव करने जा रही है। जल्द ही स्कूलों में प्रवेश से पहले आंखों के अनिवार्य टेस्ट होंगे। दिल्ली गेट स्थित गुरु नानक नेत्र अस्पताल की सिफारिश पर सरकार ने यह फैसला लिया है।
बताया जा रहा है कि टेस्ट के बाद अगर किसी बच्चे की दृष्टि में किसी भी तरह का दोष पाया जाता है तो पहले उसका इलाज कराना होगा। अगर दृष्टि सामान्य रहती है तो उक्त बच्चे को एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा। जिसे स्कूल में दाखिले के दौरान दिखाना अनिवार्य होगा।
इसके बाद ही बच्चे को प्रवेश मिल सकेगा। अस्पताल के प्रधान सचिव डॉ. कमलेश ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया है कि तकनीक और पढ़ाई के चलते बच्चों की आंखें कमजोर हो रही हैं। माता-पिता इस ओर ध्यान नहीं देते।
देश में आंखों की समस्या तेजी से बढ़ रही है। हैरानी की बात यह है कि इसमें बच्चों का प्रतिशत काफी अधिक है। 10 करोड़ की जनसंख्या में 4 करोड़ एक आंख से काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि छोटी उम्र में ही बच्चों की आंखों की जांच कर इस समस्या को दूर किया जा सके। जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा।
जागरूकता अभियान भी चलाएगा अस्पताल
डॉ. कमलेश ने बताया कि अस्पताल की तरफ से ‘लेजी आई’ जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। प्रतिदिन एक कॉलोनी में टीम जाकर बच्चों का निशुल्क परीक्षण करेगी।
डॉ. कमलेश ने बताया कि लेजी आई उसे कहते हैं जो छोटी उम्र में ही कमजोर हो जाती है। बावजूद लोग बिना जांच करवाए काम करते रहते हैं। यह आने वाले समय में खतरनाक साबित हो सकती है और आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
सर्टिफिकेट के बगैर दाखिला तो होगी कार्रवाई
यदि स्कूल बिना विजन सर्टिफिकेट चेक किए बच्चों को दाखिला देंगे तो उन पर कार्रवाई के प्रावधान पर भी विचार किया जा रहा है। यह पूरा प्रोजेक्ट बच्चों में इस रोग को दूर करने के लिए चलाया जा रहा है।
इसमें स्कूलों का साथ होना बेहद जरूरी है। इस विजन सर्टिफिकेट पर बच्चों की आंखें कितनी कमजोर और कितनी ठीक है पूरा विवरण दिया जाएगा।