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बच्चा स्कूल जा रहा है या नहीं बस एक ऐप डाउनलोड करिए और जान लीजिए सच
रश्मि शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:02 PM IST
सार
- लक्ष्मीबाई कॉलेज ने छात्राओं की बंक मारने की आदत दूर करने के लिए बनाई योजना
- डिफॉल्टर छात्राओं की सूची भी होगी अपलोड, अभिभावकों को मिलेगी जानकारी
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- फोटो : amar ujala
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विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज ने कक्षाओं से छात्राओं की बंक मारने की आदत दूर करने के लिए योजना बनाई है। कॉलेज अब अपने मोबाइल ऐप पर ही छात्राओं की उपस्थिति अपलोड करने पर विचार कर रहा है।
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ऐप पर न केवल उपस्थिति अपलोड की जाएगी, बल्कि जिनकी उपस्थिति कम होगी, उनकी डिफॉल्टर सूची बनाकर ऐप पर डाल दी जाएगी। वर्तमान में कॉलेज प्रतिमाह अपनी वेबसाइट पर छात्राओं की उपस्थिति अपलोड करता है, लेकिन इस प्रयास में कॉलेज को ज्यादा सफलता हाथ नहीं लगी।
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अभी भी नवंबर-दिसंबर की परीक्षा के लिए जब उपस्थिति निकाली गई, तो कई छात्राओं की उपस्थिति महज 10-20 फीसदी ही पाई गई है। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. प्रत्युष वत्सला ने बताया कि सेमेस्टर परीक्षा के समय छात्राओं की कम उपस्थिति देखने को मिलती है।
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अभिभावकों का डाटा होगा तैयार
न छात्राएं और न ही अभिभावक उपस्थिति पर ध्यान देते हैं। ऐसे में कॉलेज अभिभावकों को ऐप के माध्यम से ही अलर्ट करने पर विचार कर रहा है। इसके लिए कॉलेज अभिभावकों का डाटा तैयार करेगा, जिससे उनके बच्चे की कम उपस्थिति की जानकारी भेजी जा सके।
उन्होंने बताया कि अभिभावक हमारा ऐप डाउनलोड करें, तो हम उस पर ही उन छात्रों की डिफॉल्टर सूची डाल देंगे, जिनकी उपस्थिति कम होगी। इस लिस्ट को डालने से हमें व्यक्तिगत रूप से हर अभिभावकों को जानकारी नहीं भेजनी होगी।
कॉलेज ऐप के माध्यम से पहले से काफी सुविधाएं छात्राओं को दी जा रही हैं। अभिभावकों को अलर्ट करने के लिए एसएमएस भेजने की भी योजना है। जब तक ऐप पर यह सुविधा शुरू नहीं होती, तब तक अभिभावकों को वेबसाइट पर छात्राओं की उपस्थिति को जांचना चाहिए। यदि अभिभावक अलर्ट रहेंगे, तो छात्राओं में एक डर बना रहेगा।
उन्होंने बताया कि अभिभावक हमारा ऐप डाउनलोड करें, तो हम उस पर ही उन छात्रों की डिफॉल्टर सूची डाल देंगे, जिनकी उपस्थिति कम होगी। इस लिस्ट को डालने से हमें व्यक्तिगत रूप से हर अभिभावकों को जानकारी नहीं भेजनी होगी।
कॉलेज ऐप के माध्यम से पहले से काफी सुविधाएं छात्राओं को दी जा रही हैं। अभिभावकों को अलर्ट करने के लिए एसएमएस भेजने की भी योजना है। जब तक ऐप पर यह सुविधा शुरू नहीं होती, तब तक अभिभावकों को वेबसाइट पर छात्राओं की उपस्थिति को जांचना चाहिए। यदि अभिभावक अलर्ट रहेंगे, तो छात्राओं में एक डर बना रहेगा।