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बढ़ी फीस की जांच के लिए बढ़ा अनिल देव कमेटी का कार्यकाल
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:00 AM IST
सार
अभिभावकों को बढ़ी हुई फीस लौटाने के लिए दिल्ली शिक्षा निदेशालय बनाए छात्रों की सूची-हाईकोर्ट
- बढ़ी हुई फीस की जांच के लिए बढ़ा अनिल देव कमेटी का कार्यकाल
- अभिभावकों को लौटाने के लिए 150 करोड़ हार्ईकोर्ट के कोष में मौजूद
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विस्तार
प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने तरीकों से बढ़ाई गई फीस की जांच के लिए बनाई गई अनिल देव कमेटी के कार्यकाल को हार्ईकोर्ट ने एक साल के लिए बढ़ा दिया है। इस कमेटी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2017 को समाप्त होने वाला था।
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हाईकोर्ट ने पूर्व छात्रों से वसूली गई ज्यादा फीस को भी वापस लौटाने के लिए दिल्ली शिक्षा निदेशालय को पूर्व छात्रों की सूची तैयारी करने के निर्देश भी दिए हैं। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की पीठ के समक्ष अनिल देव कमेटी ने दलील दी कि उसे अभी कुछ स्कूलों के दस्तावेजों की जांच करनी है।
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अभी तक उन्होंने 1200 प्राइवेट स्कूलों की जांच की है और 565 स्कूलों को 154 करोड़ रुपये अभिभावकों को वापस देने की सिफारिश की है। कमेटी ने बताया था वह कई स्कूलों की उनकी सिफारिशों पर पुनर्विचार याचिका और विरोध पर सुनवाई कर रही है।
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कमेटी ने दलील दी कि अगर उकना कार्यकाल और बढ़ा दिया जाए तो इस मामले की जांच के साथ उन अभिभावकों को भी बढ़ी हुई फीस वापस लेने का मौका मिलेगा जो अभी उनकी सूची से बाहर हैं। इस कमेटी का गठन 2011 में हाईकोर्ट द्वारा किया गया था।
कमेटी की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने दिल्ली सरकार व शिक्षा निदेशालय से कहा वह ऐसे अभिभावकों की सूची तैयार करें, जिनसे प्राइवेट स्कूलों द्वारा बढ़ी हुई फीस वसूली गई थी, ताकि कोर्ट उनके पैसे उन्हें वापस लौटा सके।
पीठ ने कहा कि उनके पास प्राइवेट स्कूलों से वापस लिए गए 150 करोड़ रुपए हैं, जिन्हें छात्रों और प्राइवेट स्कूलों के उन अभिभावकों को लौटाना है, जिनसे ज्यादा फीस वसूली गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीठ ने इस कमेटी के कार्यकाल को दिसंबर 2018 तक बढ़ा दिया है।
गौरतलब है कि कोर्ट में एनजीओ दिल्ली अभिभावक महासंघ ने याचिका दायर की थी, जिसमें उसने दावा किया है कि 500 स्कूलों में अभी ली गई बढ़ी हुई फीस वापस करनी है। विगत दिनों कमेटी की फीस वापस करने संबंधी सिफारिशों के खिलाफ कुछ स्कूलों ने याचिका दायर की थी। उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्कूलों द्वारा ली हुई बढ़ी फीस का 75 प्रतिशत हिस्सा कोर्ट में जमा करवाने का आदेश दिया था।