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आरक्षित सीटों की संख्या कम की जाएगी- हाइकोर्ट

Sat, 03 Mar 2018 08:27 PM IST
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 03 Mar 2018 08:27 PM IST
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allahabad highcourt said numbers of reserved seat will be decreased

देशभर के विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की भर्ती में एससी, एसटी व ओबीसी आरक्षण का आधार कुल सीट नहीं, बल्कि डिपार्टमेंट में उपलब्ध खाली सीटों पर किया जाएगा।

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केंद्र सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को मंजूरी दे दी है, जिसमें कहा था कि आरक्षण संस्थान की कुल सीट नहीं, बल्कि डिपार्टमेंट के आधार पर होना चाहिए। खास बात यह है कि आरक्षण का आधार डिपार्टमेंट होने से आरक्षित सीटों की संख्या कम हो जाएगी।
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सूत्रों के मुताबिक, मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कानून मंत्रालय से मंजूरी के बाद इस संबंध में यूजीसी को दिशा-निर्देश भेज दिया है। यूजीसी इस संबंध में इसी हफ्ते या अगले हफ्ते तक उच्च शिक्षण संस्थानों को रैगलुेशन बनाकर नोटिस जारी कर देगा।
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पहले उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल खाली सीटों के आधार पर एससी को 15 फीसदी, एसटी को 7.5 फीसदी और ओबीसी को 27 फीसदी के तहत नौकरी दी जाती थी। लेकिन अदालत के फैसले के बाद नए नियम में डिपार्टमेंट मेंं कुल खाली पदों को आरक्षण फीसदी से गुणा किया जाएगा।

आरक्षण नियमों में होगा बदलाव

बता दें कि अदालत ने फैसले में टिप्पणी की थी कि यूजीसी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में अपारदर्शी तरीके से आरक्षण नियमों को पूरा करता है। इसलिए सलाह दी जाती है कि वे आरक्षण नियमों में बदलाव करे।

अभी तक विश्वविद्यालय को यूनिट मानते हुए शिक्षकों की भर्ती होती है। इसके चलते कई डिपार्टमेंट में सिर्फ आरक्षित तो कई में सामान्य वर्ग के तहत भर्ती होती है। इससे बेहतर है कि संस्थान की कुल सीट नहीं, बल्कि डिपार्टमेंट के आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए।

सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 41 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एक अप्रैल 2017 तक 5997 पद खाली थे। इसके तहत करीब 35 फीसदी शिक्षकों के पद खाली थे।  इन खाली पदों के आंकड़ों के तहत अस्सिटेंट प्रोफेसर वर्ग में 2457 पद, एसोसिएट प्रोफेसर वर्ग में 2217 पद और प्रोफेसर वर्ग में 1098 पद हुए।

यानी पहले कुल 5997 खाली पदों पर आरक्षण नियम में शिक्षकों की भर्ती होनी थी, लेकिन नए नियम में अब प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर पद पर अलग-अलग खाली पदों पर आरक्षण के तहत भर्ती की जाएगी। इसके चलते अब आरक्षण वर्ग के शिक्षकों को अधिक लाभ नहीं मिल पाएगा।

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