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'डूसू चुनाव में 30 प्रतिशत वोट नोटा को मिलना अशुभ संकेत'
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Fri, 16 Sep 2016 12:12 AM IST
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dusu election
- फोटो : अमर उजाला
विश्व लोकतंत्र दिवस के अवसर पर प्रजातंत्र के सामने उभरती हुई प्रवृत्तियां व चुनौतियां विषय पर एसडी कॉलेज में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजनीतिक विज्ञान व इतिहास के छात्रों ने भाग लिया।
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कार्यक्रम का संयोजन राजनीतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. राजबीर सिंह ने किया व अध्यक्षता प्रिंसिपल डॉ. एमके अरोड़ा ने की।
दिल्ली के राजधानी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. राजेश झा व आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. प्रेमचंद बतौर मुख्य वक्ता मौजूद रहे।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज के लोकतंत्र में अनेक चुनौतियां हैं। सबसे बड़ी चुनौती जनता को सही नेता न मिलने की है। हाल ही में दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुए चुनावों में 30 प्रतिशत वोट नाटो के डाले गए, जोकि शुभ संकेत नहीं है।
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पिछले वर्ष की तुलना में अबकी बार का चुनाव आठ प्रतिशत कम रहा है। इसलिए उम्मीदवार को जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए अपनत्न चरित्र पर विशेष ध्यान देना होगा।
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दूसरी चुनौती राजनीति में बदले की भावना से कार्य करना। सत्तारूढ़ नेता हारे हुए नेता के प्रति बदले की भावना से कार्य करने लगते हैं तथा जनता से किए वायदे को भूल जाते हैं।
जबकि जिस नेता को जनता ने नकार दिया है, उसके प्रति बदले की भावना रखने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिए लोगों की भावनाओं पर खरा उतरने का प्रयास ही सच्चा लोकतजंत्र है। इस अवसर पर डॉ. धर्मचंद विद्यालंकार, डॉ. अंजू, डॉ. सैनी, डॉ. बलकार सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार रखे।