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दिल्ली: 2000 निजी स्कूल नहीं लेंगे एरियर
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 16 Dec 2017 08:21 AM IST
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निजी स्कूलों में एरियर के नाम पर बढ़ाई गई फीस से परेशान अभिभावकों के लिए थोड़ी राहत भरी खबर है। लगभग 2000 पब्लिक स्कूलों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए एरियर नहीं लिए जाने का फैसला किया है।
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स्कूलों ने वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने में असमर्थता जतायी है। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को स्कूलों की ओर से इस संबंध में सूचना दी जा चुकी है। एरियर की राशि नहीं लिए जाने के पीछे स्कूलों का तर्क है कि उनके स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक एक जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2017 तक बढ़ी हुई फीस का एरियर देने की स्थिति में नहीं हैं।
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दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.सी जैन ने कहा कि लगभग 2000 पब्लिक स्कूलों ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं करने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार से मान्यता प्राप्त व सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों ने अपने विद्यालय की प्रबंध समिति में अभिभावकों की उपस्थिति में जब 24 महीने की फीस का एरियर व फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा तो अधिकतर अभिभावकों ने इसे देने में असहमति व्यक्त की।
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उन्होंने कहा कि यदि सातवें वेतन आयोग को लागू करने के लिए फीस बढ़ाते हैं तो अभिभावक स्कूलों के बाहर प्रदर्शन करेंगे और इससे झगड़े बढ़ेंगे। सरकार यदि स्कूलों को दो वर्षों में थोड़ी-थोड़ी फीस बढ़ाने की अनुमति देती रहती तो इस समय अधिक फीस बढ़ाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने दिल्ली सरकार पर अभिभावकों को झूठे सपने दिखाने का आरोप लगाया।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वह सरकार से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं कराके फीस के अनुसार वेतन के निर्धारण की मांग करें। उन्होंने बताया कि एसोसिएशन ने सभी स्कूलों से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू ना करने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान चलाया हुआ है। अब जल्द ही 2 हजार स्कूल के प्रबंधकों के हस्ताक्षर कराकर सरकार को सौंपे जाएंगे।
अभिभावकों ने किया उपमुख्यमंत्री के आवास पर प्रदर्शन
निजी स्कूलों की ओर से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए बढ़ाई गई फीस के विरोध में अभिभावकों का गुस्सा फूटने लगा है। शुक्रवार को अभिभावकों का यह गुस्सा उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर भी फूटा। शुक्रवार सुबह अभिभावकों ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान अभिभावकों ने जमकर नारेबाजी भी की। दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में अभिभावक देर शाम तक उपमुख्यमंत्री से मिलने के लिए धरने पर बैठे रहे।
दिल्ली पैरेंट्स एसोसिएशन से जुड़े अभिभावक हितेश कौशिक ने बताया कि देर शाम उन्हें पुलिस वहां से उठाकर तिलक मार्ग थाने ले गई और कुछ देर बाद उन्हें छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सातवें वेतन आयोग के नाम पर फीस बढ़ाने की अनुमति स्कूलों को दे दी है जबकि स्कूलों के पास पहले से ही सरप्लस फंड है। स्कूल इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। सातवें वेतन आयोग के नाम पर अभिभावकों से पैसा ले लिया जाएगा लेकिन शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन नहीं दिया जाएगा। स्कूलों ने शिक्षा का पूरी तरह से व्यवसायीकरण कर दिया है। हम चाहते थे कि इन सब मामलों पर उपमुख्यमंत्री के साथ बैठकर चर्चा हो लेकिन उन्होंने मुलाकात नहीं की। अब रविवार को एक बार फिर से अभिभावक उनके घर के बाहर एकत्र होंगे।
दीपालय स्कूल के बाहर भी नारेबाजी
वहीं कालकाजी स्थित दीपालय स्कूल के बाहर अभिभावकों ने फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। अभिभावकों का कहना था कि मनमाने तरीके से फीस बढ़ाई जा रही है। यह फीस अभिभावकों की जेब पर भारी पड़ रही है। अभिभावकों ने कहा कि उनसे दो साल का एरियर मांगा जा रहा है जो कि सरासर गलत है। अभिभावकों को समझ नहीं आ रहा कि फीस के इस बढ़े बोझ को कैसेे वहन करेंगे।