12वीं के नतीजों में भारी गिरावट के चलते कांग्रेसियों ने AAP पर कसा तंज, कहीं ये बातें
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दिल्ली सरकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाने का दावा करती है लेकिन इससे उलट बीतेे दो सालों में लगभग एक लाख बच्चों ने सरकारी स्कूलों को छोड़ दिया है। जबकि इसी अवधि में प्राइवेट स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 1.42 लाख बढ़ गई है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने यह दावा किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये के विज्ञापन देकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने सरकार के पांच हजार नए क्लास रूम बनवाने के दावे को भी गलत भ्रामक बताया।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने ‘दिल्ली सरकार की शिक्षा की सच्चाई: एक भंडाफोड़’ विषय पर एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि दिल्ली की जनसंख्या में औसतन 2.4 फीसदी की बढ़ोतरी प्रतिवर्ष हो रही है।
वहीं सीनियर सेकेंडरी स्कूलों की बढ़ोतरी में रिकॉर्ड 0.60 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की ओर से प्रचार किया जाता है कि बीते तीन साल के कार्यकाल में सरकारी स्कूलों में बारहवीं के नतीजों में सुधार हुआ है।
जबकि जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ औनर ही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिक्षा के क्षेत्र में अच्छा काम हो रहा है तो सरकारी स्कूलों मेें पास हुए छात्रों के पास प्रतिशत और दाखिलों के प्रतिशत में लगातार गिरावट क्यों आ रही है।
साल दर साल छात्रों की संख्या कम हुई
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्ष 2013-2014 में विद्यार्थियों की संख्या 17.75 लाख थी जबकि वर्ष 2014-2015 में घटकर 17.04 लाख रह गई और 2015-16 में तो यह संख्या घटकर केवल 16.77 लाख रह गई।
प्राइवेट स्कूल में दाखिले की बात करें तो 2013-2014 में पब्लिक स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 26.11 लाख थी जो 2014-15 में बढ़कर 27.09 लाख हो गई और 2015-16 में यह संख्या 27.53 लाख तक पहुंच गई।
12वीं में पास होने वालों की संख्या में कमी
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्ष 2014 में बोर्ड की परीक्षा सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1.47 लाख विद्यार्थी पास हुए थे। यह संख्या लगातार गिरते हुए 2015 में 1.24 लाख, 2016 में 1.1 लाख और 2017 में केवल 1.09 लाख रह गई।
वहीं वर्ष 2015 में निजी स्कूलों में 12वीं की परीक्षा में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या 0.67 लाख थी, यह 2016 में बढ़कर 0.83 लाख हो गई और 2017 में यह संख्या बढ़कर 0.91 लाख तक पहुंच गई। वहीं बीते तीन सालों में बारहवीं में बैठने वालों की संख्या में भी कमी आई है।
बजट में बढ़ोतरी, नहीं हो सका खर्च
दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल में शिक्षा के बजट में तो बढ़ोतरी की लेकिन वह खर्च करने में कामयाब नहीं रही है। दो साल में 1982 करोड़ रुपया लैप्स (बिना खर्च हुए रह गया) इस तरह से शिक्षा का बजट खर्च करने में 11.57 फीसदी की कमी आई।
2015-16 में यह राशि 1000.73 करोड़ थी और 2016-17 में यह राशि 981.45 करोड़ रह गई है। जबकि वर्ष 2013-14 में बजट एलोकेशन में खर्च न की गई राशि का प्रतिशत 4.81 था वह 2014-15 में बढ़कर 6.67 प्रतिशत जो 2015-16 में 13.55 फीसदी हो गया।