उत्तराखंड पंचायत चुनाव नतीजे: 'छोटी सरकार' बनाने में निर्दलियों का दबदबा
- देर रात तक ग्राम प्रधान पदों पर 80 प्रतिशत परिणाम ही घोषित कर पायाराज्य निर्वाचन आयोग।
- जिला पंचायत सदस्यों के 356 पदों में से 45 के परिणाम ही हो पाए घोषित
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पंचायत चुनाव के तहत मतपत्रों की गणना में राज्य निर्वाचन आयोग सोमवार देर रात तक ग्राम प्रधान पदों पर 80 प्रतिशत परिणाम ही घोषित कर पाया। जिला पंचायत सदस्यों के 356 पदों में से 45 के परिणाम ही घोषित हो पाए थे। इनमें से अधिकतर जिलों में भाजपा को झटका लगा है।
भाजपा और कांग्रेस, दोनों ने ही अपनी-अपनी जीत का दावा किया। शुरुआती दौर के परिणाम से यह भी संकेत मिले हैं कि जिला पंचायतों में बोर्ड गठन को लेकर दोनों ही प्रमुख दलों को निर्दल प्रत्याशियों का सहारा लेना होगा।
पंचायत मतगणना सोमवार सुबह आठ बजे शुरू हुई। देर रात तक राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से ग्राम प्रधान के पदों पर करीब 80 प्रतिशत परिणाम घोषित किए जा चुके थे। इनमें से 124 पद रिक्त रहे। वहीं, 1515 पदों पर ग्राम प्रधान निर्विरोध निर्वाचित हुए।
सदस्य क्षेत्र पंचायतों के 2984 पदों में से 299 निर्विरोध निर्वाचित हुए। 10 पद रिक्त हैं। बाकी के बचे 2675 पदों में से 1592 पदों पर ही परिणाम घोषित हो पाए थे। जिला पंचायत सदस्य पदों के 356 पदों में से नौ निर्विरोध निर्वाचित हुए। 60 पर ही परिणाम घोषित हो पाए।
भाजपा को झटका लगने के मिल रहे संकेत
पिथौरागढ़ और पौड़ी के ही सबसे अधिक परिणाम घोषित हुए थे। शुरुआत के इन परिणामों से भाजपा को झटका लगने के ही संकेत मिले। वहीं, भाजपा की ओर से अधिकतर सीटों पर जीत का दावा किया गया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि जिला पंचायतों में बोर्ड भाजपा का ही बनेगा। इसी तरह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने भी जिला पंचायतों में कांग्रेस की जीत का दावा किया। साफ है कि अब दोनों ही दलों को निर्दल प्रत्याशियों का सहारा लेना होगा।
उपचुनाव से पहले भाजपा को झटका
पिथौरागढ़ में कुल 27 सीटों में 12 पर भाजपा के समर्थित प्रत्याशी जीते। 15 में भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। यहां विधानसभा उपचुनाव भी होने हैं। ऐसे में भाजपा के सामने यहां संकट खड़ा हो सकता है।
गढ़वाल में जिला पंचायत सदस्य पद के नतीजे
पौड़ी - 14 सीटों पर परिणाम घोषित हो पाए थे, इसमें से पांच ही भाजपा के खाते में आईं।
उत्तरकाशी - 25 सीटों पर परिणाम घोषित हो पाए थे। इसमें 17 में से दो पर ही भाजपा के समर्थित प्रत्याशी जीत पाए।
रुद्रप्रयाग - 18 में से 11 जिला पंचायत सदस्यों के परिणाम घोषित। आठ सीटें यहां निर्दलियों के खाते में गईं।
टिहरी - सात सीटोें में से चार भाजपा और एक कांग्रेस और दो निर्दलीय रहे।
देहरादून- छह सीटों के परिणाम घोषित हो पाए थे। इसमें से तीन सीटें भाजपा के खाते में गईं।
चमोली- 26 में से तीन के परिणाम घोषित हुए थे। एक भाजपा, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय।
दिग्गजों को कहीं हार तो कहीं सहारा
कांग्रेस को चमोली में सहारा मिला। यहां पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी की पत्नी रजनी भंडारी जिला पंचायत सदस्य पद पर जीत गईं। रजनी जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदार भी हैं। भाजपा को दूसरी ओर कुमाऊं में झटका लगा। पिथौरागढ़ में भाजपा के पूर्व मंत्री बिशन सिंह चुफाल की बेटी दीपिका चुफाल चुनाव हार गई।
कुमाऊं में जिला पंचायत सदस्य पद के नतीजे
पिथौरागढ़ : जिला पंचायत सदस्य के 33 पदों में से 29 पदों पर परिणाम घोषित हो पाए थे। 12 भाजपा समर्थित प्रत्याशी हैं। एक पद के लिए पहले ही निर्विरोध चुनाव हो चुका है
चंपावत : 15 पदों के लिए चुनाव हुआ। सात के रिजल्ट घोषित इनमें पांच भाजपा समर्थित हैं।
अल्मोड़ा : जिला पंचायत के 45 पदों में से 42 सीटों पर चुनाव हुआ। नौ सीटों पर परिणाम घोषित हुए। इनमें तीन-तीन भाजपा और कांग्रेस समर्थित हैं। दो पर निर्दलीय और एक पर उक्रांद का कब्जा रहा। तीन पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।
बागेश्वर : जिला पंचायत सदस्य के 19 पदों में से चार पर चुनाव परिणाम घोषित। इनमें दो भाजपा तो दो कांग्रेस समर्थित जीते हैं।
नैनीताल : 27 में से 26 पदों पर चुनाव हुआ। एक निर्विरोध चुना गया। देर शाम तक 10 के परिणाम घोषित। इनमें भाजपा का एक और 9 निर्दलीय हैं।
यूएस नगर : 35 पदों पर चुनाव हुआ। देर शाम तक पांच पदों का रिजल्ट घोषित। इनमें खटीमा में दो सीटें भाजपा समर्थित और एक पर निर्दलीय विजयी हुआ। सितारगंज में दो सीटों पर निर्दलियों ने बाजी मारी।
कप प्लेट का टूटा तिलिस्म, गांवों ने चखा ‘अनानास’ का स्वाद
दरअसल, कप प्लेट चुनाव चिन्ह के बारे में एक मिथक भी प्रचलित है कि जिसके पास यह चुनाव चिन्ह आएगा उसकी जीतने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि, पंचायत चुनाव में हिंदी वर्णमाला के क्रम के अनुसार दिया जाता है। लिहाजा, प्रत्याशी भी अपने हिसाब से डमी कैंडीडेट भी खड़ा कर देते थे। ऐसे में वे मनचाहा चुनाव चिन्ह हासिल करने में कामयाब हो जाते थे। लेकिन, इस बार प्रधान पद के लिए कप प्लेट चुनाव चिन्ह को शामिल ही नहीं किया गया था।
अब इसके पीछे यही वजह थी या कुछ और यह बात तो सामने नहीं आई, लेकिन इस बार गांवों में अनानास का जादू खूब चला। रात करीब दस बजे तक कुल 150 ग्राम प्रधान पदों के नतीजे आ चुके थे, जिनमें से 70 अनानास चुनाव चिन्ह वाले प्रत्याशियों ने विजयश्री का स्वाद चखा। दूसरे नंबर पर आईसक्रीम तो दूसरे नंबर पर ईमली रही। जबकि, अनाज की बालियां चौथे नंबर पर रहा।
रायपुर ब्लॉक में सबसे कम उम्र की प्रधान शिवानी
रायपुर ब्लॉक के लावड़कोट गांव की नवनिर्वाचित प्रधान शिवानी कंडारी सबसे कम उम्र 25 वर्ष की प्रधान बनीं। शिवानी पहली बार चुनाव मैदान में खड़ी हुईं थीं। शिवानी ने एमए तक पढ़ाई की और वे गांव में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम करना चाहती हैं। शिवानी के सामने पांच प्रत्याशी और खड़े हुए थे।
पंचायत में कुल 269 वोट डाले गए, जिनमें से शिवानी को 71 मत मिले। जबकि, उनके गांव के गजेंद्र सिंह 64 मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। शिवानी शादीशुदा हैं और उनके पति धीरज बिजनेस करते हैं।