उत्तराखंड: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नॉन क्लीनिकल पीजी की फीस घटी, बांड की व्यवस्था खत्म
- सचिव स्वास्थ्य ने जारी किया शासनादेश, इसी सत्र से लागू होगी नई फीस
- पांच लाख से घटाकर एक लाख की गई नॉन क्लीनिकल पाठ्यक्रम की फीस
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब नॉन क्लीनिकल पीजी की पढ़ाई एक लाख रुपये में होगी। सात साल के बाद नॉन क्लीनिकल पीजी पाठ्यक्रम की फीस को सालाना पांच लाख से घटाकर एक लाख किया गया है।
शुक्रवार को सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी ने फीस निर्धारण का शासनादेश जारी किया है। वहीं, सरकार ने नॉन क्लीनिकल पीजी पाठ्यक्रमों में बांड की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
यह भी पढ़ें: श्रीदेव सुमन विवि से अब ऑनलाइन मिलेगी संबद्धता, निजी महाविद्यालयों की मनमानी पर लगेगा अंकुश
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नॉन क्लीनिकल पीजी पाठ्यक्रम एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायो केमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन, माइक्रो बायोलॉजी व कम्युनिटी मेडिसिन संचालित किए जाते हैं।
मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह रही थीं
वर्ष 2013-14 में नॉन क्लीनिकल पाठ्यक्रम के लिए पांच लाख की फीस निर्धारित की गई थी। बांडधारी छात्रों के लिए 60 हजार रुपये और बिना बांड वाले छात्रों से पांच लाख की फीस ली जाती थी, लेकिन पाठ्यक्रमों में छात्रों की रुचि कम होने के कारण मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह रही थीं।
प्रदेश सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए नए सिरे से फीस का निर्धारित किया है। सरकार का माना है कि फीस कम होने से छात्र नॉन क्लीनिकल पीजी में प्रवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।