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उत्तराखंड: यूजी नीट काउंसलिंग में पकड़ी गड़बड़ी, पांच अभ्यर्थियों के सीट आवंटन पत्र पर रोक
Sun, 06 Feb 2022 12:21 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 06 Feb 2022 12:21 PM IST
सार
हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने कुछ अभ्यर्थियों के आवंटन पत्र पर रोक लगाते हुए शासन को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे हैं।
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यूजीसी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
यूजी नीट की काउंसलिंग में अभ्यर्थियों के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की काउंसलिंग में गड़बड़ी सामने आई है। दाखिले के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान ऐसे पांच अभ्यर्थी पकड़े गए हैं, जिन्होंने दोनों राज्यों में जरूरी प्रमाण पत्र जमा करने में गड़बड़ी की है। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने इन अभ्यर्थियों के आवंटन पत्र पर रोक लगाते हुए शासन को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश मांगे हैं।
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चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, कुछ अभ्यर्थियों ने यूपी की स्टेट काउंसलिंग मेें वहां का और उत्तराखंड में यहां का मूल निवास प्रमाण पत्र लगाया है। कुछ इसी तरह की शिकायत जाति प्रमाण पत्र को लेकर भी हैं। प्राथमिक जांच में गड़बड़ी सामने पर चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने पांच अभ्यर्थियों के सीट आवंटन पत्र रोक दिए हैैं। शासन से इस मामले में दिशा-निर्देश मांगे हैैं।
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सात फरवरी तक होने हैैं दाखिले
हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय आजकल नीट स्टेट काउंसलिंग का आयोजन कर रहा है। सरकारी और निजी कालेजों में एमबीबीएस, बीडीएस के दाखिले के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग चल रही है। प्रथम चरण में सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और दाखिले सात फरवरी तक होने हैैं।
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इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन को कई अभ्यर्थियों के मूल निवास, जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी प्रमाण पत्रों के बारे में जानकारी मिली है कि वह गलत जानकारी के आधार पर काउंसलिंग में शामिल हो रहे हैं। विश्वविद्यालय की पड़ताल में यह बात साबित भी हो गई। ऐसे में स्वाभाविक है कि दोनों जगह लगाए गए प्रमाण पत्रों में एक जगह के प्रमाण पत्र फर्जी हैं।
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि पांच ऐसे मामले सामने आए हैं। इन अभ्यर्थियों को सीट तो आवंटित कर दी गई है, लेकिन इनके आवंटन पत्र रोक लिए गए हैं। शासन से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा है। उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इस संबंध में विस्तृत जानकारी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी डाल दी गई है।