उत्तराखंड: दुर्गम प्रदेश में हांफती लाइफ लाइन, बामनाथ गदेरे पर बना पुल तीन साल से पड़ा क्षतिग्रस्त
सालों पहले आपदा में बह चुके कई पुल नहीं बन पाए हैं। ऐसे में बरसात के दौरान लोगों को जान हथेली पर लेकर इन नदी-नालों को पार करना पड़ता है। पहाड़ की इन दुश्वारियों को सामने लाने के लिए अमर उजाला ने इस अभियान की शुरुआत की है।
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सिस्टम की सुस्ती ने पहाड़ के मुश्किल जीवन को दुश्वार कर दिया है। सड़कों और पुलों को विकास का पैमाना कहा जाता है। इस पैमाने के हिसाब पहाड़ पर विकास सालों से हांफ रहा है। ऐसे कई नदी, नाले और गदेरे हैं जहां आज भी पुल नहीं हैं।
सालों पहले आपदा में बह चुके कई पुल नहीं बन पाए हैं। ऐसे में बरसात के दौरान लोगों को जान हथेली पर लेकर इन नदी-नालों को पार करना पड़ता है। पहाड़ की इन दुश्वारियों को सामने लाने के लिए अमर उजाला ने इस अभियान की शुरुआत की है। चौथी कड़ी में पढ़िए... चमोली जिले के लोगों की परेशानी।
10 गांवों के ग्रामीणों को नापनी पड़ रही 10 किमी की अतिरिक्त दूरी
बामनाथ गदेरे में पंद्रह वर्ष पहले बना गार्डर पुल तीन साल से क्षतिग्रस्त पड़ा है। ऐसे में पोखरी ब्लाक के नैल, ऐंथा, खाल, भिकोना, आलीशाल गांव के साथ ही समीपवर्ती 10 गांवों के ग्रामीणों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जलस्तर कम होने पर ग्रामीणों को गदेरे से ही आवाजाही करनी पड़ती है जबकि गदेरे का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीण लगभग 10 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
क्षतिग्रस्त हिस्से अभी भी गदेरे में पड़े हुए हैं
बामनाथ गदेरे पर वर्ष 2006 में गार्डर पुल का निर्माण हुआ था। तब गांवों के छात्र-छात्राएं इसी पुल से आवाजाही कर इंटर स्तर की पढ़ाई के लिए जीआईसी नैल-ऐंथा और सांकरी पहुंचते थे, लेकिन वर्ष 2018 में बरसात के दौरान गदेरे में बाढ़ आने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया।
पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से अभी भी गदेरे में पड़े हुए हैं। इसके बाद ग्रामीणों के समक्ष आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है। लोक निर्माण विभाग ने भी पुल का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा, लेकिन आज तक विभाग का प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहा है।
ग्रामीणों की परेशानी का आलम यह है कि पुल न होने से ग्रामीण अपने घरों से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। मनोज भंडारी और बृजमोहन चमोला का कहना है कि गदेरे पर पुल की आवश्यकता है। पुल न होने से ग्रामीण मीलों दूरी अतिरिक्त तय कर रहे हैं।
लोनिवि के ईई राजकुमार का कहना है कि नौ अगस्त 2019 को पोखरी के बामनाथ गदेरे पर पैदल झूला पुल बह गया था। लोनिवि ने 54 मीटर लंबे स्पान के झूला पुल का स्टीमेट बनाकर 2 करोड़ 20 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन अभी तक पुल के लिए बजट प्राप्त नहीं हुआ है। जैसे ही बजट प्राप्त हो जाएगा, पुल का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।