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चमोली आपदा: डीजीपी बोले, अब किसी के जीवित मिलने की आस नहीं, तीन-चार दिन और चलेगा रेस्क्यू अभियान 

Mon, 15 Feb 2021 07:18 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 15 Feb 2021 07:18 PM IST
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Uttarakhand Chamoli News : DGP Ashok kumar told rescue operation will Held three or for days only
डीजीपी अशोक कुमार - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

उत्तरखंड के चमोली जिले में आई आपदा के बाद अब रेस्क्यू ऑपरेशन ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि अब किसी के जीवित बचने की आस नहीं है। ऐसे में अब अभियान ज्यादा से ज्यादा तीन दिन और चलाया जा सकता है। इसके बाद अभियान को बंद कर दिया जाएगा। 

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डीजीपी ने बताया कि वहां पर पुलिस फोर्स और एसडीआरएफ अन्य विभागों व बचाव दल के साथ मिलकर पूरी ताकत से काम कर रही है। फिलहाल, गांवों और टनल में शव मिल रहे हैं। कुछ दिन पहले तक लग रहा था कि टनल में कुछ लोग जीवित हो सकते हैं। लिहाजा, वहां पर राहत व बचाव कार्य को तेजी से किया गया। लेकिन, वहां पर दुश्वारियों के चलते काम बहुत ज्यादा तेज नहीं हो पाया। 
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अब वहां पर किसी के जीवित होने की उम्मीद नहीं बची है। ऐसे में तीन से चार दिनों में काम बंद कर दिया जाएगा। हालांकि, छोटे-छोटे अभियान जारी रहेंगे। मसलन, साफ-सफाई आदि। ऐसे में यदि शव मिलते हैं तो परिजनों के सुपुर्द कर दिए जाएंगे। बाकी बचे लोगों को सरकार जो भी एसओपी बनाती है उसके हिसाब से मृत घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें आवश्यक मानकों के आधार पर सहायता आदि उपलब्ध कराई जाएगी। 

एफआईआर हो रही हैं लगातार दर्ज 
डीजीपी ने बताया कि लोगों की ओर से लगातार एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं। जोशीमठ थाने में अब तक 35 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। ऐसे में कानूनन जो भी मदद देने का प्रावधान है उसके हिसाब से पुलिस काम कर रही है। सभी पीड़ितों के डीएनए सैंपल भी लिए जा जा रहे हैं। ताकि, शवों और मानव अंग के डीएनए से उनका मिलान कराया जा सके। 

नौ दिन बाद नीती घाटी के लोगों की आवाजाही हुई आसान

जल प्रलय के नौ दिन बाद अब अलग-थलग पड़े नीती घाटी के गांवों में आवाजाही आसान होने लगी है। सबसे दुर्गम क्षेत्र में बसे जुग्जु गांव के लिए धौली गंगा पर ट्रॉली लगा दी गई है, जबकि भंग्यूल गांव के लिए दो दिन पहले ही ट्रॉली शुरू हो गई थी। अब ग्रामीण इनकी मदद से आवाजाही करने लगे हैं। वहीं ऋषि गंगा पर रैणी गांव के समीप एक वैकल्पिक पुल भी तैयार किया गया है।

ऋषि गंगा पर रैणी गांव के समीप सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने एक वैकल्पिक पुल तैयार किया है। नीती घाटी के ग्रामीण इसी पुल से आवाजाही करने लगे हैं। सोमवार को चीन सीमा क्षेत्र मलारी से जोशीमठ लौटे सेना के जवानों ने भी इसी पुल से आवाजाही की। ट्रॉली और पुल का संचालन होने से ग्रामीणों को राहत मिली है।

लाता गांव के दरमान सिंह रावत, रघुवीर सिंह राणा, तोलमा गांव के प्रेम सिंह बुटोला और पैंग गांव के शंकर सिंह राणा और पूरण सिंह राणा ने बताया कि बीआरओ की ओर से बनाए गए वैकल्पिक पुल से आवाजाही शुरू होने से ग्रामीणों को राहत मिली है। ग्रामीण अपने रोजमर्रा के कार्यों के लिए जोशीमठ और तपोवन तक आ जा सकेंगे।

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