उत्तराखंड: शिक्षकों की भर्ती में कला विषय के उम्मीदवारों के लिए बीएड की अनिवार्यता हो सकती है खत्म
- सहायक अध्यापक भर्ती सेवा नियमावली में फिर किया जा सकता है बदलाव
- उम्मीदवारों ने दी चेतावनी, कहा- अनदेखी की गई तो करेंगे आंदोलन
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उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती में कला विषय के उम्मीदवारों को राहत मिल सकती है। ड्राइंग एवं फाइन आर्ट्स में एमए करने वाले उम्मीदवारों के लिए बीएड की अनिवार्यता को खत्म किया जा सकता है।
शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी संदुरम ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् को इसका प्रस्ताव भेजा है। इसे मंजूरी मिलने के बाद सहायक अध्यापक भर्ती सेवा नियमावली में बदलाव किया जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर उम्मीदवारों का कहना है कि उनके हितों की अनदेखी हुई तो आंदोलन को बाध्य होंगे।
प्रदेश में आगामी वित्तीय वर्ष में माध्यमिक शिक्षकों के तीन हजार से अधिक पदों पर भर्ती होनी है, लेकिन शिक्षकों की इस भर्ती से पहले अधीनस्थ शिक्षा सेवा नियमावली में बदलाव कर दिया गया है।
सहायक अध्यापक एलटी कला के लिए ड्राइंग एवं फाइन आर्ट्स विषय में बीए एवं बीएड या फिर राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् से मान्यता प्राप्त किसी संस्थान से बीएएड की चार वर्षीय डिग्री को अनिवार्य कर दिया गया है। शिक्षक सेवा नियमावली में इस बदलाव से उन उम्मीदवारों को झटका लगा है जो बीएड नहीं हैं।
उम्मीदवार विद्या के मुताबिक प्रदेश में सहायक अध्यापक के पदों पर प्रदेश में अब तक जितनी भी भर्तियां हुईं, किसी में भी फाइन आर्ट्स के उम्मीदवारों के लिए बीएड अनिवार्य नहीं था, लेकिन हाल ही में नियमावली में बदलाव कर शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे प्रदेश के हजारों उम्मीदवारों के लिए रास्ता बंद कर दिया गया है।
उधर, राज्य युवा कल्याण परिषद् के पूर्व उपाध्यक्ष रविंद्र जुगरान ने कहा कि शिक्षा विभाग बीएड को भविष्य के लिए अनिवार्य करे, लेकिन वर्तमान में बेरोजगारों की समस्या को देखते हुए नियमावली में एक बार फिर से बदलाव किया जाना चाहिए।
इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् को पत्र लिखा जा चुका है। इसे मंजूरी मिलने से ड्राइंग एवं फाइन आर्ट्स से एमए करने वाले उम्मीदवारों का शिक्षक बनने का रास्ता साफ हो जाएगा।
-आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक