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UPSC Result 2018: इन सवालों के जवाब ने मीनल को बना दिया आईएएस, पढ़िए उनका सक्सेज मंत्रा

Sun, 07 Apr 2019 06:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 07 Apr 2019 06:14 PM IST
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Upsc civil services exam 2018 result 35th rank Uttarakhand Topper Meenal karnwal interview
अपनी मां के साथ मीनल कर्णवाल - फोटो : अमर उजाला

आप कहां के रहने वाले हैं? मीनल का जवाब- उत्तराखंड प्रदेश। सामने बैठे पैनल ने फिर सवाल पूछा, अगर आपको वहां की जिम्मेदारी दी गई तो विकास और पर्यावरण के बीच तालमेल कैसे करेंगी? मीनल ने जवाब दिया-विकास जरूरी है लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।

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हम अगर विकास की योजनाओं के दौरान पर्यावरण के बारे में नहीं सोचेंगे तो दूरगामी परिणाम बहुत बुरे होंगे। ऐसे ही सवाल का जवाब देकर देहरादून की मीनल कर्णवाल ने सिविल सेवा परीक्षा में देशभर में 35वीं रैंक हासिल की है।
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देहरादून के आशीर्वाद एनक्लेव निवासी मीनल कर्णवाल ने सेंट जोजेफ्स एकेडमी से 93.2 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं, 96.5 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं पास की। इसके बाद दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से वर्ष 2015 में बीए पास किया।

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ऐसे की तैयारी

मीनल समाज के बीच रहकर समाज के लिए कुछ करना चाहती थी, लिहाजा सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2016 में पहली बार परीक्षा दी और प्री पास कर पाई। 2017 में फिर परीक्षा दी लेकिन पास नहीं कर पाई। बावजूद इसके मीनल ने हिम्मत नहीं हारी।

2018 में तीसरी बार परीक्षा दी और देशभर में 35वीं रैंक हासिल की। मीनल के पिता उमेश कर्णवाल भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं जबकि मां सिम्मी कर्णवाल गृहिणी हैं। उनके बड़े भाई मुंबई में अधिवक्ता हैं जबकि छोटा भाई इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। मीनल ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विषय चुना था।

मीनल ने बताया कि वह रोजाना आठ घंटे तक पढ़ाई करती थीं। लेकिन परीक्षा के दौरान वह 16 से 18 घंटे तक भी पढ़ती थीं। रविवार को छुट्टी का दिन होने पर वह फिल्म देखने भी जाती थीं।

यह सवाल भी पूछे गए

मीनल से पूछा गया कि उत्तराखंड की राजधानी दून में है जबकि हाईकोर्ट नैनीताल में है। लोगों को दिक्कत होती है तो क्या हाईकोर्ट को देहरादून में शिफ्ट किया जाना चाहिए? इस पर मीनल ने कहा कि चूंकि देहरादून का इंफ्रास्ट्रक्चर फिलहाल राजधानी के हिसाब से पर्याप्त है।

लिहाजा, ऐसा बदलाव करने से पहले शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना होगा। उनसे यह भी सवाल पूछा गया कि गैर उत्तराखंडी लोगों को प्रदेश में 250 स्क्वायर यार्ड से अधिक जमीन खरीदने का अधिकार नहीं है, जिस वजह से विकास नहीं हो पाता और लोगों को रोजगार नहीं मिल पाता।

क्या आप अपने पास जिम्मेदारी आने पर इस नियम में बदलाव करवाएंगी? इस पर मीनल ने कहा कि बिल्कुल भी नहीं। इसके बजाए हमें तरक्की के दूसरे रास्ते जैसे टूरिज्म, खेती चुनने होंगे।

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