राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने किया यूओयू के दीक्षांत समारोह का शुभारंभ, प्रीतम भरतवाण को दी मानक उपाधि
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राज्यपाल ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके दरवाजे सबके लिए खुले रहते है। ज्यादातर पाठ्यक्रमों के लिए कोई प्रवेश परीक्षा नही होती। यहां न आयु का कोई बंधन है और न ही स्थान का। राज्यपाल ने लोकगायक और जागर सम्राट प्रीतम सिंह भरतवाण को मानद उपाधि व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। दीक्षांत समारोह में स्नातक एवं स्नातकोत्तर के 2256 विद्यार्थियों को उपाधियां एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
समारोह में पहली बार सात शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। इनमें ऋ तु नौटियाल, ममता कुमारी (शिक्षक शिक्षा विभाग), विपिन चंद्रा, आरती भट्ट, शिव प्रसाद जोशी (पत्रकारिता), दिनेश चंद्र कर्नाटक (हिंदी) और दीपक चंद्र (समाजशास्त्र) शामिल हैं। कार्यक्रम में विधायक राजेश शुक्ला, पूर्व संयुक्त निदेशक उच्चशिक्षा डॉ. बहादुर सिंह बिष्ट, डॉ. भानु प्रताप, डॉ. शेर सिंह मेहरा, संयुक्त मजिस्ट्रेट अभिषेक रुहेला, एडीएम हरबीर सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय, एसडीएम एपी बाजपेयी आदि उपस्थित थे। संचालन कुलसचिव प्रोफेसर भरत सिंह ने किया गया।
पंडित नैनसिंह रावत के पैतृक गांव में बनेगा स्मारक: धनसिंह
उच्चशिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत ने कहा कि सर्वेयर पंडित नैन सिंह रावत के नाती भरत सिंह आज उत्तराखंड मुक्त विवि में कुलसचिव हैं। उन्होंने घोषणा की कि पंडित नैन सिंह रावत की स्मृति में पिथौरागढ़ जनपद में उनके पैतृक गांव में स्मारक बनाया जाएगा। उनकी प्रतिमा भी लगाई जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा विलुप्तता की ओर है इसलिए सरकार जल्द ही गढ़वाली एवं कुमाऊंनी अध्ययन केंद्र खोलने जा रही है। उच्चशिक्षा मंत्री ने कहा सरकार प्रत्येक विश्वविद्यालय में संस्कृत, वेद एवं योग विषय अनिवार्य रूप से सरकार लागू करने जा रही है।
मंत्री ने कहा कि कई निजी विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह दिल्ली में होते थे मगर अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं कि दीक्षांत समारोह दिल्ली में नहीं यहीं करने होंगे। सरकार ने शिक्षक दिवस पर उच्चशिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच प्रोफेसरों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। यह सम्मान डॉ. भक्त दर्शन सिंह की जयंती के अवसर पर किया जाएगा।
सीमिति संसाधनों में पाया बड़ा मुकाम : कुलपति
कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल ने कहा कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय इस समय प्रगति यात्रा के 13वें वर्ष में चल रहा है। अपने सीमित संसाधनों में राज्य के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय की सूची में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति को आसानी से उच्चशिक्षा मिल सके, इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने की व्यवस्था की गई है।