फर्जी डिग्री-असली नौकरी: एसआईटी ने शिक्षा विभाग से मांगे 211 शिक्षकों के प्रमाण पत्र
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प्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की जांच कर रही एसआईटी ने हरिद्वार जनपद के 211 शिक्षकों के प्रमाण पत्र जांच के लिए मांगे हैं। एसआईटी ने इन शिक्षकों के नामों की लिस्ट विभाग को सौंपी है।
जिन शिक्षकों के प्रमाण पत्र मांगे गए हैं, ये सभी शिक्षक वर्ष 2012 से 2016 के बीच नियुक्ति पाने वाले हैं। लेकिन, हैरान करने वाली बात यह है कि विभाग की ओर से एसआईटी को सीधे प्रमाण पत्र दिए जाने के बजाए शिक्षकों से प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं।
प्रदेश में शिक्षकों की नियुक्ति के फर्जीवाड़े की जांच कर रही एसआईटी ने हरिद्वार जनपद के 211 विद्यालयों के इतने ही शिक्षकों के प्रमाण पत्र जांच के लिए मांगे हैं। एसआईटी की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक जनपद हरिद्वार को लिखे पत्र में कहा गया है कि अपर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान एवं कानून व्यवस्था के वर्ष 2017 के आदेश पर बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत फर्जी शिक्षकों एवं अन्य समस्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच विशेष अन्वेषण दल अपराध अनुसंधान विभाग देहरादून की ओर से की जा रही है।
इसके तहत विभिन्न माध्यमों से कुछ शिक्षकों के नाम सामने आए हैं। जांच के लिए इन शिक्षकों के हाईस्कूल, इंटर, बीएससी, बीएड एवं अन्य प्रमाण पत्रों की आवश्यकता है, लेकिन विभाग की ओर से इन शिक्षकों के प्रमाण पत्र रिकार्ड के आधार पर एसआईटी को न सौंपकर शिक्षकों से प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं।
बताया गया है कि प्रदेश भर में जांच के दौरान जिन शिक्षकों के प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। विभाग के पास उनके प्रमाण पत्र नहीं हैं। ऐसे में सीधे शिक्षकों से उनके प्रमाण पत्र मांगे जाने से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले शिक्षक फर्जीवाडे से बच सकते हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि कोई शिक्षक ओबीसी के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पा गया हो, वह एसआईटी को फर्जी प्रमाण पत्र देने से बचेगा और फर्जीवाडे से बचने के लिए जुगाड़ कर जांच अधिकारी को असली प्रमाण पत्र दिखा सकता है। शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, शिक्षकों से सीधे प्रमाण पत्र मांगना गलत है। संबंधित विभागीय अधिकारी को रिकार्ड देखकर एसआईटी को प्रमाण पत्र सौंपने चाहिए।
पूर्व में मंत्री भी जता चुके हैं नाराजगी
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने पूर्व में शिक्षकों से सीधे उनके प्रमाण पत्र मांगे जाने पर नाराजगी जताई थी। मंत्री का कहना था कि शिक्षकों से प्रमाण पत्र मांगे जाने के बजाए जांच के लिए विभाग को प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने चाहिए।