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उत्तराखंड: सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के सभी स्कूलों में अनिवार्य होगी संस्कृत की पढ़ाई

Wed, 18 Sep 2019 08:29 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 18 Sep 2019 08:29 AM IST
सार

  • निर्देश का पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने संबंधी होगी कार्यवाही।
  • विषय के बेरोजगार शिक्षकों को काम मिलेगा।

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Sanskrit education will be compulsory in all private schools of uttarakhand
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

प्रदेश के निजी स्कूलों में अब सरकारी स्कूलों की तर्ज पर संस्कृत शिक्षा को अनिवार्य रूप में पढ़ाया जाएगा। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने मंगलवार को इस आशय का शासनादेश जारी करने के निर्देश शिक्षा सचिव को दिए है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत को सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों के लिए भी अनिवार्य किया जाएगा। 

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शिक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत हमारी द्वितीय राजभाषा है। इसे बढ़ावा देने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से समस्त स्कूलों में अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। अगले शिक्षा सत्र से इसे अनिवार्य विषय के रूप से हर स्कूल में पढ़ाया जाएगा।
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सरकार के निर्देश का पालन न करने वाले स्कूलों की मान्यता समाप्त करने संबंधी कार्यवाही की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने कहा कि संस्कृत शिक्षा को स्कूलों में पढ़ाए जाने से द्वितीय राजभाषा को बढ़ावा मिलेगा।

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इसके साथ ही संबंधित विषय के बेरोजगार शिक्षकों को काम मिलेगा। मंत्री ने कहा कि संस्कृत को स्कूलों में पढ़ाए जाने के साथ ही समस्त सरकारी स्कूलों के नाम हिंदी के साथ ही संस्कृत में भी लिखे जाएंगे।

इसके अलावा पंचायत, युवा कल्याण, खेल, विद्यालयी शिक्षा और संस्कृत शिक्षा में बोर्ड लेखन और आमंत्रण पत्र हिंदी के साथ ही संस्कृत में प्रकाशित होंगे। आमंत्रण पत्र में प्रथम पृष्ट पर हिंदी और इसके पिछले पृष्ट पर संस्कृत में आमंत्रण पत्र प्रकाशित होंगे। 

संस्कृत को लेकर सरकार की यह सोच अच्छी है, लेकिन हर निजी स्कूल ने किसी न किसी बोर्ड से मान्यता ली है। भाषा सीखने को लेकर बोर्ड की ओर से स्कूलों को गाइड लाइन जारी होती है। इसी के आधार पर बच्चों की परीक्षाएं होती हैं। केवल शासनादेश जारी करने से इसे सभी स्कूलों पर लागू करवा पाना आसान नहीं होगा। शासनादेश के बजाए यदि एनसीईआरटी की ओर से इस तरह के निर्देश होते तो स्कूल इसे गंभीरता से लेते। निजी स्कूल जर्मन, फ्रैंच पढ़ाना अधिक पसंद करते हैं।
- पुष्पा मानस, पूर्व शिक्षा निदेशक 

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