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उत्तराखंड: 2800 सरकारी स्कूलों में 10 तक सिमटी छात्रों की संख्या, अब शिक्षकों की तैनाती पर संकट

Tue, 21 Jan 2020 12:21 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 21 Jan 2020 12:21 PM IST
सार

  • छात्र संख्या बढ़ाने के लिए द्वार-द्वार फरियाद लगा रहे शिक्षक
  • प्रदेश में 10 छात्र संख्या वाले 28 सौ से अधिक हैं स्कूल 
     

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Only 10 Students Studying in uttarakhand 2800 Each Schools
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

प्रदेश के हजारों शिक्षकों की तैनाती पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। उनके स्कूलों में घटती छात्र संख्या इसकी वजह बन रही है। प्रदेश में 2800 से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जिनमें छात्र संख्या 10 तक सिमट गई है। इससे कम होने पर स्कूलों में ताला लटक सकता है।

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स्कूलों पर ताला लटक जाने से वहां तैनात शिक्षकों की नौकरी पर आंच आ सकती है। यही वजह है कि अब स्कूलों का वजूद बचाने के लिए मास्टर जी को ही हाथ पांव मारने पड़ रहे हैं। वे द्वार-द्वार जाकर अभिभावकों से फरियाद लगा रहे हैं कि वे अपने बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराएं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के वे उन्हें फायदे गिना रहे हैं।
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राज्य गठन के 19 सालों में कम छात्र संख्या के कारण 800 से अधिक स्कूलों पर ताला लटक चुका है। जबकि 28 सौ से अधिक स्कूलों में कभी भी ताला लटकने की आशंका है। यही वजह है कि शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश भर में इन दिनों प्रवेशोत्सव मनाया जा रहा है।
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शिक्षा निदेशक आरके कुंवर के मुताबिक प्रवेशोत्सव के तहत शिक्षक घर-घर जाकर संपर्क अभियान चला रहे हैं। अभियान के तहत अभिभावकों को बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। मिड डे मील के साथ ही सरकार की ओर से फ्री ड्रेस दी जा रही है। किताबें एवं कुछ अन्य सुविधाएं भी बच्चों को दी जा रही हैं।

प्रवेशोत्सव का नहीं दिख रहा असर

प्रदेश में छात्रों की घटती संख्या के चलते शिक्षा विभाग हर बार की तरह इस बार भी प्रवेशोत्सव मना रहा है, लेकिन कार्यक्रम चलाए जाने के बाद भी इसका असर दिखाई नहीं दे रहा है। छात्र बढ़ने के बजाए घटते जा रहे हैं।

यह है वजह
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में पब्लिक स्कूलों के प्रति बढ़ता आकर्षण और पलायन घटती छात्र संख्या की अहम वजह है। स्कूलों में सुविधाओं का भी अभाव है। कई स्कूल भवन जर्जर हैं।

उन जनपदों में छात्र संख्या अधिक घटी है जहां सबसे अधिक पलायन हुआ है। इनमें खासकर पौड़ी और अल्मोड़ा दो ऐसे जनपद हैं, जहां सबसे अधिक स्कूल बंद हुए हैं। अब शिक्षक घर-घर जाकर अभिभावकों से बात कर रहे हैं, यदि छात्र संख्या घटेगी तो स्कूल बंद कर दिए जाएंगे। वहां तैनात शिक्षकों का दूसरी जगह तबादला कर दिया जाएगा।
-आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक

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