अच्छी खबर: एमबीबीएस के बाद एमडी, एमएस की जगह अब आठ विषयों में कर सेकेंगे पीजी डिप्लोमा
- छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों ने किया सरकार के फैसले का स्वागत
- कहा, चिकित्सकों की कमी काफी हद तक दूर होगी
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एमबीबीएस के बाद एमडी, एमएस के बजाय विकल्प के तौर पर पीजी डिप्लोमा शुरू होगा। केंद्र सरकार ने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन को इसकी अनुमति दे दी है। इसके तहत एमबीबीएस करने के बाद छात्र दो साल का पीजी डिप्लोमा कर सकता है और कहीं भी प्रैक्टिस कर सकता है।
चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों और छात्रों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। चिकित्सा शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में पीजी मेडिकल की करीब 50 हजार सीटें हैं। इनके लिए 1.70 लाख से ज्यादा आवेदन आते हैं।
अब पीजी डिप्लोमा कोर्स शुरू होने से लाखों डॉक्टरों को मेडिकल की उच्च शिक्षा मिल सकेगी। इससे खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्पेशलिस्ट मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की कमी दूर होगी। यह कोर्स किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल, जहां 100 से ज्यादा बेड हों, सीनियर मेडिकल स्पेशलिस्ट हों, वहां चलाए जा सकेंगे।
मेडिकल छात्र अंकित का कहना है कि एमबीबीएस के बाद एमडी, एमएस के लिए सरकारी सीट पर मारामारी रहती है और निजी कॉलेज में फीस बहुत ज्यादा है। ऐसे में निश्चित तौर पर पीजी डिप्लोमा का अच्छा विकल्प तैयार होगा।
इन आठ विषयों में होगा पीजी डिप्लोमा
ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, एनेस्थेसियोलॉजी, ट्यूबरक्यूलोसिस एंड चेस्ट डिजीज, रेडियो डायग्नोसिस, फैमिली मेडिसिन, ऑप्थैल्मोलॉजी और ईएनटी।
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने पिछले साल से डिप्लोमा कोर्स बंद कर दिए थे। उसे पूरा करने के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन को अधिकृत किया गया है। मेडिकल कॉलेज अलग से कोर्स नहीं चलाएंगे, बल्कि एनबीई के मानकों के हिसाब से सीधे निजी अस्पताल भी चला सकेंगे। छात्रों के लिए यह बेहतर करियर विकल्प रहेगा।
- प्रो. हेमचंद्र, कुलपति, एचएनबी मेडिकल विवि, देहरादून