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कुमाऊं विश्वविद्यालय ने लागू किया सॉफ्टवेयर ‘उरकुंड’, चोरी कर थीसिस बनाई तो खैर नहीं

Sun, 24 Feb 2019 10:16 AM IST
अलका त्यागी सुमित जोशी, अमर उजाला, नैनीताल
सुमित जोशी, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 24 Feb 2019 10:16 AM IST
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डेमो - फोटो : डेमो

शोध में साहित्यिक चोरी को रोकने के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय ने साफ्टवेयर ‘उरकुंड’ लागू कर दिया है। अब शोध करने वालों को पहले थीसिस की जांच करानी होगी। उरकुंड से मिले प्रमाण पत्र को थीसिस के साथ जमा करना होगा।

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यूजीसी ने स्वीडन की एक कंपनी के साथ अनुबंध कर यह सॉफ्टवेयर बनाया है। उरकुंड में जैसे ही किसी शोधग्रंथ को जांच के लिए अपलोड किया जाता है तो वह अपने पास उपलब्ध पूर्व में हो चुके शोध, साहित्यों के संग्रह से उसका मिलान करता है।
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शोधग्रंथ के शीर्षक, अन्य सामग्रियों का पूर्व में हुए शोधों से हो रहे मिलान और संदर्भित नहीं किए गए कथनों के विषय में बताता है। उसे साहित्य की चोरी मान कर उसके प्रतिशत को बता देता है।

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किसी व्यक्ति द्वारा कहे कथन और अन्य माध्यम से ली गई सामग्री को शोधग्रंथ में माध्यम सहित पूर्ण रूप से वर्णित, संदर्भित करने पर उरकुंड उसे नियमों के अनुसार साहित्य चोरी नहीं मानता है।

शोधग्रंथ में कम से कम 20 फीसदी तक अवर्णित सामग्री के प्रयोग की अनुमति देने पर भी विचार हो रहा है। विश्वविद्यालय के वरिष्ठ सूचना वैज्ञानिक डॉ. युगल जोशी ने बताया कि वेबसाइट से मिली जानकारियों के साथ संबंधित वेबसाइट के लिंक का विवरण देने पर प्रयोग की गई सामग्री मान्य है।
 

देखा गया है कि शोधार्थी थीसिस लिखते समय ऐसे माध्यमों से भी सामग्री ले लेते हैं जहां उसके लेखक का नाम दर्ज नहीं होता है।

यूजीसी के सख्त निर्देशों का पालन

शोध कार्य को लेकर यूजीसी की ओर से मिले सख्त निर्देशों का पालन करते हुए कुमाऊं विवि में उरकुंड को प्रभावी किया जा रहा है। इससे पहले देश के कई बड़े विश्वविद्यालयों ने थीसिस को इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जांचना शुरू कर दिया है।
-प्रो. डीके नौड़ियाल, कुलपति कुमाऊं विवि

यूजीसी के नए नियमों के मुताबिक पीएचडी थीसिस की जांच उरकुंड के माध्यम से की जाएगी और उसी के बाद ही थीसिस के मूल्यांकन की कार्रवाई की जाएगी। शोधार्थी को थीसिस के साथ उरकुंड से मिला प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा। 
- प्रो. राजीव उपाध्याय, निदेशक शोध कुमाऊं विवि

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