JEE Mains Result: कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनना चाहते हैं उत्तराखंड टॉपर बशार, बताया सफलता का राज
- बोले-सोशल मीडिया और फोन पढ़ाई के दौरान समय खराब करने वाले
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इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन में उत्तराखंड में टॉप करने वाले बशार अहमद अपने बड़े भाई की तरह ही कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनना चाहते हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया केवल समय खराब करते हैं। इसके बजाय पढ़ाई पर ही फोकस किया जाए तो सफलता निश्चित है।
साईंलोक कॉलोनी, जीएमएस रोड निवासी ओएनजीसी में महाप्रबंधक अतीक अहमद के छोटे बेटे बशार अहमद ने जेईई मेन परीक्षा में 99.993 परसेंटाइल हासिल किया है। उन्होंने इसी साल टोंस ब्रिज स्कूल से 97.25 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की है जबकि दो साल पहले ब्राइटलैंड स्कूल से 97 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं पास की थी।
उनकी मां हिना गृहिणी हैं। बशार ने बताया कि उनके बड़े भाई बिलाल बंगलूरू की एक आईटी कंपनी में इंजीनियर हैं। उन्होंने वेल्लोर इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की थीं। इसलिए वह भी अपने बड़े भाई की तरह ही कंप्यूटर साइंस इंजीनियर बनना चाहते हैं।
आईआईटी बांबे या कानपुर है प्राथमिकता
अब बशार अहमद आईआईटी दाखिलों की प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस की तैयारियों में जुट गए हैं। वह आईआईटी बांबे या आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग करना चाहते हैं।
सोशल मीडिया करती है समय बर्बाद
बशार का कहना है कि मोबाइल व सोशल मीडिया पर समय लगाने वाले युवाओं को सफलता की कामना नहीं करनी चाहिए। वह खुद पढ़ाई के दौरान इनसे दूर रहे हैं। उस समय को पढ़ने या अन्य अच्छे कामों में लगाया जाए तो उसका सार्थक फल मिलता है। किसी भी टेक्नोलॉजी का प्रयोग तब तक ही करना चाहिए जितनी उसकी आपको जरूरत है। नियमित आठ से नौ घंटे पढ़ाई करने वाले बशार को क्रिकेट, संगीत व फिल्में देखना पसंद हैं। वह बताते हैं कि पढ़ाई के बीच खुद को तरोताजा करने के लिए वह ज्यादातर संगीत सुनते हैं।
इंजीनियर बनने का सपना अब होगा पूरा
सामान्य परिवार की बेटी स्वाति ने पांच साल पहले इंजीनियर बनने का सपना देखा। अब वह सपना हकीकत में बदलने जा रहा है। स्वाति ने जेईई मेन परीक्षा में 92.019 परसेंटाइल स्कोर किया है।
देहरादून में नवादा निवासी स्वाति सक्सेना के पिता कृष्ण कुमार घर पर ही आटा चक्की चलाकर गुजारा करते हैं। बेटी को पढ़ाना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उनकी चाहत के आगे सभी छोटे पड़ गए। स्वाति ने हिम ज्योति स्कूल से 12वीं पास की।
इसके बाद बलूनी क्लासेज ने मुफ्त में इंजीनियरिंग की कोचिंग दी। नतीजतन उसने जेईई मेन परीक्षा में 92.019 परसेंटाइल हासिल कर मान बढ़ाया। स्वाति के परिवार में इससे खुशी की लहर है। स्वाति ने बताया कि उन्होंने सातवीं कक्षा से ही इंजीनियर बनने का सपना देखा था। वह मैकेनिकल इंजीनियर बनना चाहती हैं।
बलूनी क्लासेज के एमडी विपिन बलूनी ने बताया कि चूंकि स्वाति होनहार थी और आगे बढ़ना चाहती थी। इसलिए उन्होंने उसे कोचिंग देकर आगे बढ़ने में मदद की है। स्वाति घर में काम और चक्की में भी हाथ बंटाती है। घर में माता-पिता के अलावा एक छोटा भाई है, जो 9वीं कक्षा में पढ़ता है।
आईजी के बेटे ने पाई 99.925 परसेंटाइल
एडीजी एवं वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर आईजी नार्थवेस्ट फ्रंस्टियर, आईटीबीपी दीपम सेठ के छोटे बेटे आर्यमन मिहिर सेठ ने जेईई मेन परीक्षा में 99.925 परसेंटाइल हासिल की है। इससे पूर्व उन्होंने 12वीं की परीक्षा में भी पूरे प्रदेश में टॉप किया था।
शुक्रवार देर रात आए जेईई मेन-2 के नतीजों में एडीजी दीपम सेठ के छोटे बेटे आर्यमान मिहिर सेठ ने नाम रोशन कर दिया। उन्होंने जनवरी में हुई जेईई मेन-1 परीक्षा में 99.942 परसेंटाइल हासिल किया था। उनका सपना एस्ट्रो फिजिक्स में शोध करना है।
एनटीएसई, किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना की फैलोशिप पास करने वाले आर्यमन ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट और राष्ट्रीय पदक विजेता हैं। उनके बड़े भाई शुभांकर सेठ ने आईआईटी बांबे से इंजीनियरिंग की है।