बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

JEE Advanced Exam 2020: पहले पेपर में राहत, दूसरे ने उम्मीदवारों को चौंकाया

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 27 Sep 2020 08:52 PM IST
विज्ञापन
जेईई एडवासं परीक्षा
जेईई एडवासं परीक्षा - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें
देश के आईआईटी में दाखिलों को होने वाली जेईई एडवांस परीक्षा इस साल भी उम्मीदवारों के लिए चौंकाने वाली साबित हुई। एक ओर जहां पहले पेपर ने उम्मीदवारों को राहत दी तो दूसरी ओर दूसरे पेपर ने जोर का झटका भी दिया। इस साल भी परीक्षा में कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं।
विज्ञापन


रविवार को विभिन्न केंद्रों पर जेईई एडवांस का आयोजन किया गया। परीक्षा में कोविड-19 को लेकर पूरी सतर्कता दिखी। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले छात्रों की थर्मल स्क्रीनिंग हुई और सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा गया। निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू हो गई। पहला पेपर सुबह नौ बजे से 12 बजे के बीच हुआ। पहला पेपर देने वाले उम्मीदवार काफी संतुष्ट थे, लेकिन दूसरे पेपर ने पसीने छुड़ा दिए।


परीक्षा देने वाले छात्र अंकित का कहना है कि दूसरे पेपर में कई ऐसे सरप्राइज फैक्टर थे, जिनकी वजह से पेपर लंबा दिखा। कई सवाल ऐसे भी थे, जिनका एक भी जवाब सही नहीं था। कुछ सवाल ऐसे भी थे, जिनके गलत होने पर दो अंकों की निगेटिव मार्किंग थी। कम्यूटर बेस्ड टेस्ट में छात्रों के पास विकल्प था कि वे विकल्प पर अपनी प्रतिक्रिया बदल सकते थे, छात्र प्रश्न को रिव्यू के लिए मार्क कर सकते थे साथ ही सेव करने अगले प्रश्न पर जा सकते थे।

जेईई एडवांस में उम्मीदवारों के सामने एक बड़ा बदलाव कुल अंकों का रहा। इस बार पेपर 396 अंक का आया। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स के सवाल समान अनुपात में बंटे थे। वर्ष 2017 में जेईई एडवांस 366 अंक की हुआ था। वर्ष 2018 में इसे 360 अंक कर दिया गया। जबकि गत वर्ष परीक्षा 372 अंक की हुई थी। परीक्षा देने वाले छात्रों का कहना है कि पेपर-1 की तुलना में पेपर-2 आसान पर लंबा था। ओवरऑल पेपर की बात करें तो फिजिक्स मुश्किल, मैथ्स मध्यम और केमिस्ट्री अपेक्षाकृत आसान था। गणित थोड़ा गणनात्मक और लंबा जरूर था।

खासकर बीजगणित व कैलकुलस ने ज्यादा समय लिया। केमिस्ट्री का सेक्शन आसान था और प्रश्न सीधे सिलेबस से पूछे गए थे। कार्बनिक और अकार्बनिक केमिस्ट्री की तुलना में भौतिक रसायन विज्ञान में प्रश्नों का प्रतिशत अधिक था। प्रश्न एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों पर आधारित थे। फिजिक्स का हिस्सा बहुत लंबा था। कुछ चैप्टर्स जैसे रोटेशन, वर्क पॉवर एनर्जी, मैग्नेटिज्म आदि से काफी ज्यादा प्रश्न पूछे गए थे। निरंतरता और भिन्नता, व्युत्पन्न का अनुप्रयोग से भी प्रश्न पूछे गए। विशेषज्ञ सामान्य वर्ग के लिए 35 प्रतिशत, ओबीसी के लिए 30 प्रतिशत, एससी-एसटी के लिए 15 प्रतिशत कटऑफ की उम्मीद लगा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X