इंजीनियरिंग करने वालों के लिए जरूरी खबर, अब इतने घंटे काम करने के बाद ही मिलेगा सर्टिफिकेट
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आईआईटी, एनआईटी से लेकर सामान्य इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक करने वाले छात्रों को अब 2000 घंटे काम करने के बाद ही इंजीनियर का सर्टिफिकेट मिलेगा। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) इसके लिए प्रोफेशनल इंजीनियर्स बिल लाने जा रहा है।
ग्राफिक एरा में आयोजित स्मार्ट इंडिया हैकाथन में पहुंचे एआईसीटीई के वायस चेयरमैन डॉ. एमपी पुनिया ने बताया कि एग्जिट एग्जाम का प्रस्ताव निरस्त कर दिया है। इसके बजाय प्रोफेशनल इंजीनियर्स बिल ज्यादा कारगर होगा।
बीटेक की पढ़ाई के दौरान और उसके बाद कुल मिलाकर 2000 घंटे काम करना जरूरी होगा। मसलन, यदि कोई सिविल इंजीनियरिंग कर रहा है तो उसके भीतर ब्रिज बनाने जैसी काबिलियत होनी चाहिए।
जब इतने समय काम करने के बाद वह काबिलियत आ जाएगी तो एआईसीटीई उसका बतौर इंजीनियर प्रमाणन करेगा। उसे अलग से सर्टिफिकेट दिया जाएगा जो कि उसके प्लेसमेंट में काम आएगा।
जिस कॉलेज में जितनी फैकल्टी, उतनी ही सीटें
एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग की गिरती साख को बचाने के लिए नया नियम लागू किया है। इसके तहत जिस निजी या सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में जितनी फैकल्टी होगी, उसी अनुपात में सीटें भी दी जाएंगी।
अभी तक कॉलेजों में बड़े पैमाने पर विश्वविद्यालयों की ओर से सीटें बांट दी जाती थी, जो कि नए सत्र से नहीं चलेगा। एआईसीटीई वायस चेयरमैन डॉ. एमपी पुनिया ने बताया कि इस नियम के बाद कई राज्यों के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों की स्थायी भर्तियां की जा रही हैं।