फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Education policy changed in uttarakhand Students can do On demand board exam

उत्तराखंड: अब छात्र ऑन डिमांड दे सकेंगे बोर्ड परीक्षाएं, जानिए शिक्षा नीति के कुछ और बदलाव

Thu, 04 Jul 2019 10:34 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 04 Jul 2019 10:34 AM IST
विज्ञापन
Education policy changed in uttarakhand Students can do On demand board exam
शिक्षा सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम - फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड में शिक्षा नीति में कुछ बदलाव किए गए हैं। अब छात्र ऑन डिमांड बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे। वहीं अलग-अलग स्कूलों की बजाय अगले कुछ वर्षों में स्कूल कॉम्प्लेक्स देखने को मिल सकते हैं। इसमें आंगनबाड़ी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई होगी।

विज्ञापन


केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से तैयार की गई नई शिक्षा नीति के मसौदे में इसका प्रस्ताव दिया गया है। इसके अनुसार अलग-अलग स्तर के पांच से छह स्कूलों को बंद कर उनके स्थान पर एक कॉम्प्लेक्स खोला जा सकता है। विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव को लेकर अपनी अलग-अलग राय दी है।
विज्ञापन


बुधवार को ननूरखेड़ा स्थित एससीईआरटी सभागार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे पर चर्चा के लिए एक कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि शिक्षा सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम ने इसका शुभारंभ करते हुए शिक्षा नीति में बदलाव की आवश्यकता पर रोशनी डाली।
विज्ञापन
विज्ञापन


निदेशक विद्यालयी शिक्षा आरके कुंवर ने नीति के मसौदे को राज्य के परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत बताई। निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने शिक्षा के लिए जीडीपी का 20 फीसदी हिस्सा खर्च करने की सिफारिश की।

संयुक्त निदेशक एससीईआरटी कुलदीप गैरोला ने नीति के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी। अनुज्ञा पैन्यूली, साधना डिमरी, डॉ. राकेश गैरोला, डॉ. अंकित जोशी, डॉ. अजय चौरसिया, डॉ. हरेंद्र अधिकारी ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिये नीति के अलग-अलग बिंदुओं को विस्तार से बताया।

दूसरे सत्र में समूह चर्चा के माध्यम से विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए। प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौहान ने पर्वतीय राज्यों के लिए नीति में विशेष प्रावधान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की स्थिति दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बिल्कुल अलग है। इस अवसर पर अपर निदेशक अजय नौडियाल, संयुक्त निदेशक कंचन देवराड़ी, प्रदीप रावत, अपर निदेशक वीएस रावत, शशि चौधरी, विभागाध्यक्ष सीमैट दिनेश गौड़, विनोद ढौंडियाल, मोहन बिष्ट समेत अन्य मौजूद रहे। 

इन्होंने दिए सुझाव
कार्यशाला में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के राज्य समन्वयक अम्बरीश बिष्ट, रूम टू रीड की राज्य समन्वयक पुष्पलता रावत, जवाहर नवोदय विद्यालय समिति की डा. अंजली ध्यानी, द दून स्कूल के डॉ. विदुकेश विमल, केवीएस के इंद्रजीत सिंह, नारी शिल्प विद्यालय मंदिर इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य कुसुम नैथानी, सीएनआई की प्रधानाचार्या विनीता मार्टिन, समग्र शिक्षा अभियान की विशेषज्ञ पल्लवी नैन, एससीईआरटी के हरीश बडोनी, बीपी मैंदोली, संजीव चेन, डॉ. विनोद सेमवाल समेत विभिन्न जिलों के डायट प्राचार्य, बीईओ और उप शिक्षा अधिकारी और शिक्षकों ने सुझाव दिए।

व्यावहारिक शिक्षा पर दें जोर : सुंदरम
सचिव विद्यालयी शिक्षा डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने व्यावहारिक शिक्षा पर जोर दिया। कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। वर्तमान में बच्चों के सीखने का स्तर संतोषजनक नहीं है। बच्चों के पाठ्यक्रम में मानव स्वास्थ्य से लेकर छोटी बीमारियों और उनसे बचाव की जानकारी जैसे विषय होने चाहिए। उन्होंने बेसिक स्किल डेवलपमेंट पर भी जोर दिया। उन्होंने लोगों से नीति पर अपने-अपने सुझाव और आइडिया देने की अपील की। कहा कि भारत सरकार की वेबसाइट (एमवाईजीओवी डॉट इन) पर जाकर ऑनलाइन भी सुझाव दिए जा सकते हैं। 

शिक्षा नीति मसौदे के प्रमुख बिंदु
-एनसीईआरटी प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (तीन से आठ वर्ष आयु) के लिए उत्कृष्ट पाठ्यक्रम तैयार करेगी।
-बच्चों को मध्याह्न भोजन के अलावा पौष्टिक नाश्ता (केला और दूध) भी दिया जाए।
-12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राओं को मध्याह्न भोजन दिया जाएगा।
-कोई भी छात्र अलग-अलग विषयों की पढ़ाई अलग-अलग बोर्ड से कर सकता है। (उदाहरण के लिए हिंदी उत्तराखंड बोर्ड से पढ़ने वाला छात्र विज्ञान सीबीएसई और संस्कृत आईसीएसई से पढ़ सकता है।) 
-शिक्षक एक स्कूल कॉम्प्लेक्स में पांच से सात साल तक रहेगा। उससे पहले तबादला नहीं होगा।
- सरकारी स्कूल में बच्चों के प्रवेश की उम्र छह से घटाकर तीन साल की जाएगी। तीन साल की उम्र में आंगनबाड़ी और प्री प्राइमरी में प्रवेश हो सकेगा।
-नौवीं से 12वीं तक सेमेस्टर सिस्टम लागू होगा।
-संविदा पर शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगेगी।
- पांचवीं तक की पढ़ाई स्थानीय भाषा में होगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed