उत्तराखंड: उर्दू शिक्षक भर्ती मामले में चार अफसरों पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
- शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच कराए बिना अपात्रों की नियुक्ति करने का हैं आरोप
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उर्दू शिक्षक भर्ती मामले में शिक्षा विभाग के चार अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इस बाबत शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने निर्देश जारी करने के साथ ही शिक्षा निदेशक को जांच अधिकारी नामित कर 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है। आरोप है कि इन अफसरों ने बिना शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच कराए अपात्र 52 लोगों की नियुक्ति बतौर उर्दू शिक्षक कर दी।
शिक्षा विभाग में वर्ष 2005 से 2013 के दौरान उर्दू शिक्षकों की भर्ती की गई। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और चमोली जिले में प्राथमिक शिक्षक सेवा नियमावली के मानकों की अनदेखी कर यूपी के अलीगढ़ की एक संस्था के प्रमाण पत्रों को हाईस्कूल, इंटर और स्नातक मानते हुए शिक्षकों के पदों पर भर्ती कर दी। इन अधिकारियों ने अदीब, अदीब ए माहिर एवं अदीब ए कामिल के प्रमाण पत्रों के आधार पर यह नियुक्तियां की।
शासन ने इस मामले में हाल ही में संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया था। जवाब में इन अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने 1994 के एक शासनादेश के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन किया। अधिकारियों का जवाब से असंतुष्ट शासन ने अब संयुक्त निदेशक माध्यमिक शिक्षा भूपेंद्र नेगी, उप निदेशक नागेंद्र बर्त्वाल, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक पौड़ी गढ़वाल केएस रावत व जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक चंपावत सत्यनारायण के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
ऐसे हुआ था प्रकरण का खुलासा
वही प्रकरण में एक अन्य अधिकारी उप शिक्षा निदेशक एससीईआरटी पुष्पा रानी वर्मा को शासन ने राहत दी है। उनके मामले में बताया गया कि उस दौरान संबंधित जनपद में वह नियुक्ति अधिकारी नहीं थी। पुष्पा रानी के स्थान पर उनसे पूर्व के अधिकारी के बारे में रिपोर्ट तलब की गई है।
दरअसल, अमर उजाला के फर्जी डिग्री असली नौकरी अभियान के बाद शासन ने एसआईटी को शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश दिए थे। जिसमें ऊधमसिंह नगर के एक उर्दू शिक्षक के प्रमाण पत्रों की जांच में पाया गया कि शिक्षक के पास हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र नहीं हैं।
आरोपी शिक्षक मामले को लेकर हाईकोर्ट गया तो हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश के इस तरह के अन्य शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच कराई गई। जांच में पाया गया कि विभाग में इस तरह के 52 शिक्षक हैं। पूर्व में हाईकोर्ट ने इस मामले में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही विभाग हरकत में आया।