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पढ़ाई नहीं लड़ाई में अव्वल हैं उत्तराखंड के ये विश्वविद्यालय
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 05 Oct 2016 09:23 AM IST
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राज्यपाल केके पॉल
- फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड राज्यपाल डॉ. केके पाल भले ही शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने और प्रदेश के विश्वविद्यालयों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हों, लेकिन विश्वविद्यालयों की जमीनी हकीकत अलग है।
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यहां शिक्षक, कर्मचारी और विवि प्रशासन के बीच चल रहे टकरावों की वजह से शिक्षा बदहाल पड़ी है। तकनीकी विवि, आयुर्वेद विवि, दून विवि और पंतनगर विवि में चल रहे ऐसे ही विवादों की वजह से शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
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उत्तराखंड तकनीकी विवि : विवि में बीते एक साल से कई विवाद चलते आ रहे हैं। पहले कुछ आउटसोर्सिंग वाले कर्मचारियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाने से विवाद हुआ। इसके बाद पांच नए कर्मचारी भर्ती करने पर विवाद हुआ। इसके बाद कुछ अधिकारियों के अपने परिवार वालों को नियुक्त करने पर विवाद हुआ। उधर, पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक अवधेश नौटियाल अपनी दोबारा नियुक्ति को लेकर विवि में धरने पर बैठे हुए हैं। फेल छात्र स्पेशल बैक परीक्षा की मांग कर रहे हैं। हालात यह हैं कि विवि में शिक्षण कार्यों को बढ़ावा देने के बजाए ज्यादातर समय इन्हीं विवादों में खत्म हो रहा है।
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आयुर्वेद विवि : उत्तराखंड आयुर्वेद विवि में भी विवाद बीते करीब एक साल से चलते आ रहे हैं। पहले यहां भर्ती की एक परीक्षा को लेकर विवि और राजभवन के बीच टकराव हुआ। बाद में हाईकोर्ट के आदेशों के तहत परीक्षा हुई और नियुक्तियां हुई। इसके बाद कुलसचिव की नियुक्ति पर विवाद हुआ। हाल ही में शासन ने कुलसचिव को हटा दिया। इस बीच विवि में कुलपति की नियुक्ति भी विवादों में आ गई। आजकल कुलपति प्रो. एसपी मिश्र को हटाने के लिए कई अधिकारी और बाहरी तत्व एकजुट नजर आ रहे हैं। इन सब विवादों के चलते विवि और इसके परिसरों व संबद्ध कॉलेजों में शिक्षण को लेकर कोई अच्छा फैसला नहीं हो पाया।
दून विवि : यहां भी करीब छह माह से विवाद चल रहा है। कई मुद्दों को लेकर एक ओर छात्रों का लंबा आंदोलन चला तो दूसरी ओर शिक्षिका ने कुछ छात्रों की शिकायत की हुई है, जिस पर जांच की प्रक्रिया गतिमान है। हालांकि इस बीच विवि में प्रथम छात्र परिषद का गठन करके हालात को संभालने का प्रयास तो किया है लेकिन इस सब हंगामों के बीच कहीं न कहीं शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित रहा।
पंतनगर विवि : यहां हाल ही में कुलपति ने इस्तीफा दिया था, जिसे राजभवन ने स्वीकार कर लिया है। विवि में ही एक अधिकारी को कुलपति की जिम्मेदारी तो दे दी गई है, लेकिन इससे पहले करीब एक साल तक यहां के हालात हंगामाखेज रहे। कर्मचारियों के आंदोलन और कुलपति के साथ विवादों की वजह से शिक्षण कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित रहा। अब स्थितियां सामान्य होने लगी हैं।