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उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार सुस्त
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 23 Oct 2016 10:36 AM IST
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : PTI
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पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए हाईकोर्ट का सख्त रुख है, लेकिन सरकार का रवैया निजी शिक्षण संस्थानों पर लगाम कसने के लिए ढुलमुल रहा है।
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घोषणा के बाद भी पब्लिक स्कूलों में प्रवेश से लेकर फीस निर्धारण के लिए बनने वाला एक्ट एक साल से ठंडे बस्ते में है। ऐसे में हाईकोर्ट का निजी शिक्षण संस्थानों में 6 माह के भीतर एजुकेशनल ट्रिब्यूनल बनाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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प्रदेश में पब्लिक स्कूलों की हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ोत्तरी, कुछ स्कूलों द्वारा लाखों रुपये डोनेशन की मांग, पाठ्य पुस्तकें एवं स्कूल ड्रेस तय दुकान से क्रय किए जाने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाने की शिकायत के बाद सरकार ने वर्ष 2014-15 में इस पर नियंत्रण के लिए एक्ट बनाए जाने की घोषणा की थी।
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सरकार की घोषणा के बाद शासन में इसके लिए तत्कालीन शिक्षा सचिव एमसी जोशी की ओर से इसका ड्राफ्ट तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मैराथन बैठकें हुई, लेकिन राजधानी के कुछ पब्लिक स्कूलों के विरोध के बाद सरकार इस मामले में बैकफुट पर आ गई। पब्लिक स्कूलों के लिए एक्ट बनाने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
स्वराज अभियान की अध्यक्षा कमला पंत के मुताबिक प्राईवेट स्कूलों की मनमानी पर नियंत्रण और सरकारी स्कूलों के सुधार के लिए संगठन की ओर से प्रदेश भर में 21 दिनों की पदयात्राएं निकाली गई, लेकिन एक्ट बनाने के आश्वासन के बावजूद इस पर अमल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मामले में सरकार को इसके लिए दस दिनों का अल्टीमेंटम दिया गया है, यदि इस बीच सरकार ने मांगों पर अमल न किया गया तो संगठन फिर से सड़कों पर उतरेगा।
लोकतंत्र में सबकी राय महत्वपूर्ण है, एक्ट लागू किए जाने से पहले सबके सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद ही इस पर विचार किया जाएगा। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सरकार के किसी कदम से पब्लिक स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो।
- सुरेंद्र कुमार, मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी
उन्नति प्रोजेक्ट पर भी नहीं हुआ अमल
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014-15 में उन्नति कार्यक्रम को सभी सरकारी स्कूलों में शुरू किए जाने की घोषणा की थी, लेकिन घोषणा के बावजूद कार्यक्रम शुरू नहीं हो पाया है। इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को अंग्रेजी की कोचिंग दी जानी थी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल 1130 स्कूलों में इस योजना को शुरू करने की प्रक्रिया चल रही है।