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उत्तराखंड सरकार की सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी कागजों में कैद

Mon, 04 Jul 2016 10:10 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 04 Jul 2016 10:10 AM IST
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uttarakhand centrel law university is in documents
फाइल - फोटो : Getty

उत्तराखंड सरकार की सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा एक्ट के बाद आज तक जमीन पर नहीं उतर पाई। छह साल बाद भी सरकार इस विश्वविद्यालय के लिए 20 एकड़ जमीन तक तलाश नहीं पाई है।

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दो जगहों पर जमीन का प्रस्ताव खारिज होने के बाद सरकार ने पंतनगर के निकट स्थित खुरपिया फार्म की जगह का प्रस्ताव हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा है। सरकार ने वर्ष 2010 में सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी का एक्ट पास किया था। एक्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इस विवि के विजिटर और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इस विश्वविद्यालय के चांसलर होंगे।
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सरकार ने तब कुमाऊं मंडल में भवाली में कैंपस बनाने का प्रस्ताव बनाया। लेकिन यहां 20 एकड़ जमीन एक साथ उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके बाद मखूजाताल में कैंपस का प्रस्ताव बनाया गया पर यहां भी जमीन नहीं मिली। अब सरकार ने पंतनगर के निकट स्थित खुरपिया फार्म में कैंपस बनाने का प्रस्ताव हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजा है। अभी उनका जवाब आना बाकी है। हालांकि इस बीच सरकार ने तमाम दूसरे प्रोजेक्ट के लिए आसानी से जमीन उपलब्ध करा रही है, लेकिन सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी के पहले भवाली में भूमि चयन विवादों में घिर गया। उसके बाद नई भूमि तलाशने में सालों निकल गए। 
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छत्तीसगढ़ व झारखंड से सीखे राज्य सरकार
उत्तराखंड के साथ ही छत्तीसगढ़ और झारखंड भी राज्य बना था। उस वक्त छत्तीसगढ़ और झारखंड में कोई भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी नहीं थी। छत्तीसगढ़ ने वर्ष 2003 में एक्ट पास कर हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की शुरुआत की। झारखंड सरकार ने वर्ष 2010 में एक्ट पास कर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ की स्थापना की। दोनों ही विश्वविद्यालय में न केवल देशभर बल्कि प्रदेश के होनहार भी विधि की शिक्षा ले रहे हैं। उत्तराखंड इस मामले में सबसे पीछे है।

यह हो रहा नुकसान
देश की ज्यादातर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज में उस राज्य के छात्रों के लिए अलग से सीटें आरक्षित होती हैं। यूनिवर्सिटी में कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट(क्लैट) से दाखिले होते हैं। उत्तराखंड के होनहार हर साल क्लैट देने के बावजूद स्टेट कोटे के लाभ से वंचित रह जाते हैं।


सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी के लिए भवाली और मखूजाताल में 20 एकड़ जमीन एक साथ नहीं मिल पाई। अब तीसरी जगह का प्रस्ताव बनाकर मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया है। कोई जवाब आया तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। 
-प्रो. एचएस धामी, नोडल अधिकारी, सेंट्रल लॉ यूनिवर्सिटी, उत्तराखंड

Published By : Nirmala Suyal

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