फिर लौट आया बीए, बीएससी का जमाना
- इस साल 15 से ज्यादा स्थापित कॉलेजों में आए परंपरागत कोर्स
- कई कॉलेजों ने परंपरागत कोर्स स्पेशलाइजेशन के साथ शुरू किए
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कभी 12वीं के बाद बीए, बीएससी और बीकॉम के लिए छात्रों में जो क्रेज होता था, वह दोबारा उसी उत्साह के साथ लौट रहा है। प्रदेश के बड़े कॉलेजों में इन कोर्सेज के सीटों की संख्या का निर्धारण इसकी पुष्टि करता है। छात्रों के क्रेज को देखते हुए कई शिक्षण संस्थानों ने इस साल बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे परंपरागत कोर्स शुरू कर दिए हैं।
इस साल इन कोर्सेज के लिए संबद्धता लेने वाले कॉलेजों की सूची से साफ है कि परंपरागत कोर्सेज के लिए कॉलेजों में भी काफी उत्साह है। खास बात यह है कि इन कोर्सेज के दम पर कई नए कॉलेज भी अपना नाम चमका चुके हैं। दो साल के भीतर 45 से अधिक कॉलेज इन कोर्सेज को शुरू कर चुके हैं। जबकि, कई कॉलेज इस साल से बीए, बीएससी और बीकॉम शुरू कर रहे हैं।
इन कॉलेजों में इस साल परंपरागत कोर्स
कॉलेज का नाम ---------------------कोर्स का नाम
इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया मैनेजमेंट, देहरादून -- बीएससी आईटी, बीकॉम, बीसीए
एसजीआरआर आईटीएस, देहरादून -- बीकॉम, बीएससी एग्रीकल्चर
डॉल्फिन पीजी इंस्टीट्यूट, मांडुवाला -- बीकॉम, एमकॉम
एसजीआरआर पीजी कॉलेज, देहरादून -- बीए मास कॉम ऑनर्स
सूरजमल अग्रवाल प्राइवेट कन्या महाविद्यालय, किच्छा -- एमएससी बायोटेक
सनराइज एकेडमी मैनेजमेंट सोसाइटी, देहरादून -- बीए, बीकॉम, बीएससी पीसीएम व सीबीजेड
भारतीय महाविद्यालय, हरिद्वार -- बीए, बीबीए, बीकॉम
ओमवती देवी डिग्री कॉलेज, हरिद्वार -- बीए, बीए गृह विज्ञान
कोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, रुड़की -- बीकॉम, बीसीए, बीबीए
ओमप्रकाश डिग्री कॉलेज, भगवानपुर, रुड़की -- बीए
एपेक्स इंस्टीट्यूट मंगलौर, रुड़की -- बीएससी पीसीएम, बीएससी सीबीजेड, बीकॉम, बीए
साईं इंस्टीट्यूट, देहरादून -- बीकॉम, बीएचए, एमएचए
एसबीएस डिग्री कॉलेज, सुल्तानपुर, रुड़की -- बीए, बीकॉम, बीएससी पीसीएम, बीएससी केमिस्ट्री
ग्रीन वे इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, रुड़की -- बीकॉम
जानिए, क्यों बढ़ रहा इन कोर्सेज का क्रेज
कॅरियर काउंसलर टाइम इंस्टीट्यूट के निदेशक राजीव कुकरेजा का कहना है कि बीएससी, बीए व बीकॉम करने के बाद युवाओं के भारी बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी के कॅरियर विकल्प खुले हुए हैं। वह इन कोर्स के बाद सिविल सेवा, बैंकिंग, फाइनेंस, एसएससी जैसे माध्यमों में अच्छी नौकरी हासिल कर सकते हैं। बीते कई वर्षों से यहां नौकरियों की भरमार है। जबकि बीटेक के बाद फिलहाल विकल्प सिमटते नजर आ रहे हैं। देश दुनिया में जैसे आर्थिक हालात पैदा हो रहे हैं, उससे आने वाले वक्त में बीटेक का और बुरा दौर आने वाला है।
गत वर्ष भी थे 30 से ज्यादा कॉलेज
प्रदेश में गत वर्ष बीएससी, बीए और बीकॉम के 30 से ज्यादा नए कॉलेज अस्तित्व में आए थे। दून में दूसरे कोर्स कराने वाले कई कॉलेजों में बीते दो साल में बीए, बीएससी और बीकॉम जैसे कोर्स चलाने शुरू कर दिए हैं। मारामारी का आलम यह है कि बीएससी और बीकॉम में 85 प्रतिशत से नीचे दाखिला ही नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर, बीटेक में एक छात्र के पास तीन से ज्यादा सीटों का विकल्प है। पहले चरण की काउंसिलिंग में 11800 सीटों के लिए 3194 अभ्यर्थियों ने च्वाइस लॉक की है।
Published by: Vivek Singh