{"_id":"587faf444f1c1bd804eff2ac","slug":"report-on-uttarakhand-schools","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड के स्कूलों का हाल: 54 प्रतिशत बच्चे नहीं जानते भाग करना","category":{"title":"Campus","title_hn":"कैंपस ","slug":"campus"}}
उत्तराखंड के स्कूलों का हाल: 54 प्रतिशत बच्चे नहीं जानते भाग करना
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 18 Jan 2017 11:39 PM IST
विज्ञापन
स्कूलों में शिक्षा का हाल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के स्कूलों में पढ़ाई की क्या हकीकत है यह इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद साफ हो जाएगी। इसके अनुसार प्रदेश में आठवीं कक्षा के 54 प्रतिशत बच्चे भाग करना नहीं जानते हैं। पांचवीं कक्षा के 63 प्रतिशत बच्चे भाग के सामान्य सवाल भी नहीं हल कर पाते। पांचवीं कक्षा के 48 प्रतिशत बच्चे कक्षा दो का पाठ तक नहीं पढ़ पाते हैं।
विज्ञापन
प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन की एनुअल स्टेटस ऑफ एजूकेशन रिपोर्ट (असर) में यह चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। प्रदेश के 323 विद्यालयों में सर्वेक्षण के बाद यह रिपोर्ट जारी हुई है।
विज्ञापन
रिपोर्ट में यह बातें आई सामने
-प्रदेश में 15 से 16 आयुवर्ग के 8.6 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि स्कूल नहीं जाते।
-छह साल के 3.6 प्रतिशत बच्चों का आज तक स्कूल में दाखिला नहीं हुआ।
-कक्षा तीन के 23.7 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि शब्द तक नहीं पढ़ पाते।
-कक्षा पांच के 48 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि कक्षा दो पाठ नहीं पढ़ पाते।
-कक्षा तीन के 63 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि कक्षा दो के गणित के सवाल नहीं हल कर पाते।
-कक्षा पांच के 63 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि भाग के सामान्य सवाल नहीं हल कर सकते।
-कक्षा आठ के 54 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि भाग के सवाल नहीं हल कर सकते।
-वर्ष 2010 में 32.4 प्रतिशत कक्षा तीन के बच्चे घटाव के सवाल हल कर सकते थे। 2016 में यह आंकड़ा गिरकर 23.3 प्रतिशत पर आ गया है।
-कक्षा पांच के 62 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि अंग्रेजी के सामान्य वाक्य नहीं पढ़ पाते।
-कक्षा आठ के 46.5 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि अंग्रेजी के सामान्य वाक्य नहीं पढ़ पाते।
-निजी स्कूलों के बच्चों में ट्यूशन की प्रवृत्ति साल दर साल बढ़ रही है। कक्षा एक से पांच तक के 15.2 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो कि ट्यूशन लेते हैं। गत वर्ष यह आंकड़ा 14.2 प्रतिशत था। सरकारी स्कूलों में यह तादाद अपेक्षाकृत कम है।
विज्ञापन