डीएवी में रिकॉर्ड मतदान ने उड़ाई प्रत्याशियों की नींद
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डीएवी पीजी कॉलेज में हुई बंपर वोटिंग ने इस साल छात्र राजनीति के माहिरों के लिए भी मुसीबत पैदा कर दी है। ज्यादा वोटिंग के कई मायने निकाले जा रहे हैं। अब यह देखने वाली बात होगी कि डीएवी में रिकॉर्ड मतदान कॉलेज में क्या बदलाव लेकर आएगा। फिलहाल 38 प्रत्याशियों का भाग्य मतपेटियों में कैद हो चुका है। शनिवार को मतगणना के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
डीएवी कॉलेज में शुक्रवार को मतदान निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से शुरू हुआ। सुबह से ही कॉलेज में वोटिंग के लिए भीड़ जुटनी शुरू हो गई। कई प्रत्याशियों ने बसें भेजकर अपने लिए दूर दराज तक के वोटर मंगाए थे। दोपहर तक यह तो साफ हो गया था कि मतदान का प्रतिशत बढ़ेगा, लेकिन शाम को जब मतदान का रुझान आया तो चेहरे बदल गए।
कई मायूस हो गए तो कई चेहरों पर रौनक नजर आई। कॉलेज में 8414 छात्रों में से 4376 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। गत तीन वर्षों के मुकाबले इस साल मतदान प्रतिशत दोगुना बढ़ गया है। शनिवार को सुबह नौ बजे से कॉलेज परिसर में मतगणना शुरू हो जाएगी।
एबीवीपी व एनएसयूआई के लिए साख का सवाल
डीएवी में अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी उतारने वाले एबीवीपी और एनएसयूआई के लिए यह चुनाव साख का सवाल बना हुआ है। यहां एबीवीपी नौ साल से अध्यक्ष पद पर काबिज है। एक प्रत्याशी संजय तोमर के बागी होने का संगठन को नुकसान हुआ तो मुश्किल हो जाएगी। दूसरी ओर, एनएसयूआई के लिए यह साख का सवाल इसलिए है, क्योंकि एबीवीपी इस साल दो गुटों में बंटकर चुनावी मैदान में था। अब शनिवार को स्थित साफ होगी कि क्या उलटफेर होगा या एबीवीपी जीत का दशक पूरा करेगी।
आंकड़ों के आईने से डीएवी का चुनाव
वर्ष------ मतदान------ मतदान------ प्रतिशत
2013------ 24693------ 7027------ 28.46
2014------ 17700------ 4015------ 22.69
2015------ 12264------ 3433------ 28
2016------ 8414------ 4376------ 52
बाजार में सन्नाटा
शुक्रवार को डीएवी कॉलेज रोड पर स्थित बाजार सन्नाटे से भरा रहा। चुनाव के मद्देनजर किसी भी प्रकार के हुड़दंग से बचने के लिए दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। जो दुकान खुली थी, उसमें ग्राहकों की भीड़ नजर नहीं आई। चार बजे चुनाव समाप्त होने के बाद दुकानें खुलनी शुरू हुईं।
सड़क बनी इलेक्शन कॉरिडोर
डीएवी के छात्रसंघ चुनाव में कॉलेज के बाहर की सड़क छात्र नेताओं ने अपने रंग में रंग दी थी। कॉलेज जाने वाला रास्ता बंद रहा। इस पर कॉलेज से 100 मीटर पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई थी। यहां से पहले का पूरा रास्ता चुनाव प्रचार सामग्री से पटा नजर आया।
पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई, सीसीटीवी लगी
डीएवी के स्ट्रांग रूम में सभी मतपेटियां सील करके रख दी गई हैं। यहां सीसीटीवी के साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। शनिवार सुबह सभी प्रत्याशियों के सामने इन पेटियों को कॉलेज से निकाला जाएगा। पुलिस ने भी कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
खुद एसएसपी डॉ. सदानंद दाते और एसपी सिटी अजय सिंह ने कॉलेज की सुरक्षा का मोर्चा संभाला हुआ है। शुक्रवार को चुनाव के दौरान दोनों अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। शनिवार को भी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रहेगी। बाहरी छात्रों को भीतर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केवल कैंडीडेट्स और उनके एजेंट ही मतगणना स्थल में प्रवेश कर पाएंगे। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए भी पीएसी की एक बटालियन तैनात की गई है।
सड़क बनी इलेक्शन कॉरिडोर
डीएवी के छात्रसंघ चुनाव में कॉलेज के बाहर की सड़क छात्र नेताओं ने अपने रंग में रंग दी थी। कॉलेज जाने वाला रास्ता बंद रहा। इस पर कॉलेज से 100 मीटर पहले ही पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई थी। यहां से पहले का पूरा रास्ता चुनाव प्रचार सामग्री से पटा नजर आया।
डीएवी के स्ट्रांग रूम में सभी मतपेटियां सील करके रख दी गई हैं। यहां सीसीटीवी के साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। शनिवार सुबह सभी प्रत्याशियों के सामने इन पेटियों को कॉलेज से निकाला जाएगा। पुलिस ने भी कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
खुद एसएसपी डॉ. सदानंद दाते और एसपी सिटी अजय सिंह ने कॉलेज की सुरक्षा का मोर्चा संभाला हुआ है। शुक्रवार को चुनाव के दौरान दोनों अधिकारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। शनिवार को भी सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता रहेगी। बाहरी छात्रों को भीतर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। केवल कैंडीडेट्स और उनके एजेंट ही मतगणना स्थल में प्रवेश कर पाएंगे। किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए भी पीएसी की एक बटालियन तैनात की गई है।
अब जीत का गणित लगाने में जुटे
चुनाव संपन्न होने के बाद एबीवीपी और एनएसयूआई जीत का गणित लगाने में जुट गई है। इस साल एबीवीपी के बीच भारी गुटबाजी देखने को मिली। एक कैंडीडेट संजय तोमर ने टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनौती दी है। दूसरी ओर, एनएसयूआई को भी एबीवीपी की गुटबाजी के चलते अपने पक्ष में वोटिंग का अनुमान है। हालांकि, यहां भी दूसरे गुट के नेताओं की भूमिका अपेक्षाकृत कम देखने को मिली है। फिलहाल अध्यक्ष पद पर तीसरे निर्दलीय प्रत्याशी की वजह से भी दोनों ही संगठनों को थोड़ी चिंता है। निर्दलीय प्रत्याशी किसी की भी जीत की राह मुश्किल कर सकता है। महासचिव पद पर आर्यन, सत्यम शिवम और पट्टू ग्रुप के बीच कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला होगा।
कुछ शिक्षकों को रखा चुनाव से दूर
देहरादून (ब्यूरो)। डीएवी में छात्रसंघ चुनाव में भले ही शिक्षकों की कमी हो, लेकिन कुछ शिक्षक ऐसे भी थे, जिन्हें एहतियात के तौर पर चुनाव से दूर रखा गया। यह शिक्षक किसी ने किसी छात्र संगठन से जुड़ाव रखते हैं। एबीवीपी, एनएसयूआई, भाजपा और कांग्रेस से सीधे जुड़े शिक्षकों को चुनाव से दूर रखा गया। उन्हें व्यवस्थाओं से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई।