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अब श्रीदेव सुमन विवि कराएगा पीएचडी, अकादमिक परिषद की बैठक में लिया फैसला

Tue, 28 Aug 2018 08:44 AM IST
Updated Tue, 28 Aug 2018 08:44 AM IST
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phd in sri dev suman university uttarakhand
shri dev suman university

श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से भी अब छात्र पीएचडी कर सकेंगे। विवि की अकादमिक परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा बैठक में यह भी तय कर दिया गया है कि 12वीं के बाद दो वर्ष से अधिक का अंतराल होने पर ग्रेजुएशन में दाखिला नहीं दिया जा सकता। परिषद की बैठक में कई और अहम फैसले लिए गए हैं। 

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सोमवार को दून विवि स्थित श्रीदेव सुमन विवि के शिविर कार्यालय में कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत की अध्यक्षता में अकादमिक परिषद की दूसरी बैठक हुई। बैठक में सबसे पहले 12वीं और ग्रेजुएशन के बीच के गैप (अंतराल) पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों के सामने यह प्रस्ताव आया कि गढ़वाल विवि की भांति श्रीदेव सुमन विवि में भी अंतराल का नियम खत्म कर दिया जाए, लेकिन परिषद ने साफ किया कि यह संभव नहीं है। गढ़वाल विवि में ग्रेजुएशन में दाखिलों के लिए प्रवेश परीक्षा होती है, जबकि श्रीदेव सुमन विवि में नहीं होती है। इसलिए 12वीं के बाद अगर किसी छात्र का दो वर्ष से अधिक का गैप होगा तो उसे दाखिला नहीं दिया जाएगा।   
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बैठक में स्नातक प्रथम वर्ष में चित्रकला के दाखिलों पर भी चर्चा हुई। अभी तक कुछ जगहों पर विशेषकर उत्तरकाशी जिले में 12वीं में चित्रकला न होने के बावजूद स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिला मिल जाता था लेकिन सभी सरकारी कॉलेजों के श्रीदेव सुमन विवि से संबद्ध होने के बाद अब ऐसा नहीं होगा। अकादमिक परिषद की बैठक में तय किया गया है कि जिस छात्र-छात्रा के पास 12वीं में चित्रकला विषय होगा, वही ग्रेजुएशन में भी चित्रकला पढ़ सकेगा। बैठक में तय किया गया कि 12वीं के बाद चार वर्षीय इंटिग्रेटेड बीए बीएड और बीएससी बीएड में दाखिले अब प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही होंगे। विवि स्तर से इन कोर्स की प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी जो कि 12वीं के सिलेबस पर आधारित होगी। 
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श्रीदेव सुमन विवि ने तय किया है कि अगले सत्र से विवि में विभिन्न विषयों में पीएचडी या एमफिल कराया जा सकेगा। इसके लिए विवि में एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति यूजीसी के नियमों के हिसाब से पीएचडी के ऑर्डिनेंस तैयार करेगी। कुलपति डॉ. यूएस रावत ने बताया कि अकादमिक परिषद में इस पर मुहर लगने के बाद अब अगले सत्र से पीएचडी या एमफिल कर सकेंगे। वैसे भी विवि के पास गोपेश्वर में अपना परिसर और राजकीय महाविद्यालय है, जिनकी फैकल्टी इसमें गाइड बन सकेगी।


बैठक में पीजी कॉलेज कर्णप्रयाग के प्राचार्य एवं उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. जेसी घिल्डियाल, पीजी कॉलेज गोपेश्वर के प्राचार्य प्रो. केएल मालगुड़ी, पीजी कॉलेज विकासनगर के प्राचार्य प्रो. केएल बिष्ट, उत्तरकाशी के प्रो. पीएस मखलोगा, डॉ. डीसी नैनवाल, डॉ. एमएस रौतेला, डॉ. एके तिवारी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. गिरीश बेंजवाल, डॉ. एके शुक्ल, डॉॅ. पुष्पा नेगी, डॉ. बीना खंडूडी, प्रो. बीएस बिष्ट, प्रो. एमएसएम रावत, प्रो. एसएस रावत, प्रो. दिनेश चंद्रा और विवि के कुलसचिव प्रो. दीपक भट्ट मौजूद रहे।

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