NEET Topper 2017: लगातार तीन एग्जाम टॉप करने वाले होनहार ने बताया सक्सेस मंत्रा
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देहरादून के ऋतिक चौहान ने नीट में ऑल इंडिया 317 रैंक हासिल कर उत्तराखंड टॉप किया है। आइए जानते हैं इनकी सफलता के मूल मंत्र...
ऋतिक ने बताया कि तकरीबन एक साल से वह स्मार्टफोन इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। वह सोशल मीडिया से भी दूर हैं। उनका कहना है कि ऐसी परीक्षाएं पास करने के लिए कई बार समाज से कटना पड़ता है।
ऋतिक ने कहा कि लक्ष्य को लेकर कड़ी मेहनत, सुनियोजित ढंग से पढ़ाई और एकाग्रचित रहना जरूरी है। तनाव से मुक्ति पाने के लिए वह योग करते हैं। पढ़ाई के दौरान वह गिचार बजाकर खुद को रिफ्रेश करते हैं।
सुबह के वक्त वह जीव विज्ञान और दिन में रसायन व भौतिक विज्ञान पढ़ा करते थे। शाम का वक्त रिवीजन के लिए रखा था। अविरल क्लासेस के निदेशक डीके मिश्रा ने बताया कि ऋतिक ने एम्स के साथ ही जिपमर में भी सफलता हासिल की है। पहली बार उत्तराखंड का कोई छात्र जिपमर में चयनित हुआ है। यह संस्थान के साथ ही पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
यहां से मिली प्रेरणा
अशोक पार्क निरंजनपुर निवासी ऋतिक के पिता विनोद कुमार चौहान एमडीडीए में अवर अभियंता हैं और मां सुंदर देवी गृहिणी। बड़ा भाई शुभम एमटेक कर रहा है।
एमबीबीएस दाखिलों के लिए हुई एम्स की प्रवेश परीक्षा परिणा में भी ऋतिक ने 55वीं रैंक हालिस कर उत्तराखंड टॉप किया है।
इतना ही नहीं जवाहर लाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (जिपमर) की मेडिकल प्रवेश परीक्षा में भी ऋतिक चौहान ने ऑल इंडिया 41वीं रैंक हासिल की है।
सफलता के लिए उन्होंने एक साल ड्रॉप किया। पिछले साल उन्होंने सेंट ज्यूड्स से 95.5 प्रतिशत के साथ 12वीं की। नीट और एम्स की परीक्षा दी, लेकिन परिणाम मन मुताबिक नहीं मिला। एम्स में उनकी रैंक 5382वीं थी तो नीट में 32 हजार पार। इसलिए एक साल कड़ी मेहनत की और अब सफलता मिली है।
डॉक्टर बनने की प्रेरणा ऋतिक को अपने दादा डॉ. अचपल सिंह चौहान से मिली। ऋतिक कहते हैं कि आगे चलकर वह कार्डियोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। पहाड़ के दुरूह क्षेत्रों में सेवा देने के इच्छुक हैं।