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यूटीयू में ऐसे होती है भर्ती, वीसी की चलती है मनमर्जी

Tue, 25 Oct 2016 01:26 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 25 Oct 2016 01:26 AM IST
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irregularities in joining in UTU.
सहायक परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति पर सवाल - फोटो : Amar Ujala

उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में गलत नियुक्तियों की पोल लगातार खुल रही है। इस क्रम में अब सहायक परीक्षा नियंत्रक अरुण शर्मा की नियुक्ति सवालों में आ गई है। नियमों से इतर विवि के कुलपति ने उनकी नियुक्ति का एक आदेश उपनल को भेजा, जिसके आधार पर उन्हें नौकरी पर रख दिया गया। चौंकाने वाली बात यह भी है कि इस पद की शैक्षिक योग्यता भी खुद ही तय कर दी गई।

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प्रदेश में उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) की स्थापना और उसकी कार्यप्रणाली को कई अधिकारियों ने अपने हाथ का खिलौना बना लिया है। चिंताजनक बात यह भी है कि उपनल के अधिकारी भी इसमें सहमति दे रहे हैं।
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तकनीकी विवि में सहायक परीक्षा नियंत्रक अरुण कुमार की नियुक्ति में ऐसा ही मामला सामने आया है। विवि के कुलपति प्रो. पीके गर्ग ने एक पत्र उपनल के महाप्रबंधक को भेजा। इसमें पहले पैराग्राफ में लिखा गया कि तकनीकी विवि में सहायक परीक्षा नियंत्रक (अधिकारी संवर्ग) के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से कुशल व्यक्ति उपलब्ध कराने का कष्ट करें। जिसकी शैक्षिक योग्यता मास्टर इन टेक्नोलॉजी हो, जो कि विवि के सृजित पदों के अंतर्गत है।

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नियमों को दरकिनार कर कुलपित ने खुद ही किया सबकुछ

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इसके बाद नीचे के पैराग्राफ में कुलपति ने लिखा कि कृपया शासनादेश के अनुसार निर्धारित वेतन पर अधिकारी संवर्ग हेतु अरुण कुमार को सहायक परीक्षा नियंत्रक पद पर उपलब्ध कराने का कष्ट करें। हालांकि उपनल के नियमों के हिसाब से कुलपति के बजाय कुलसचिव की ओर से पत्र भेजा जाना चाहिए था। इस पर उपनल एक विज्ञप्ति जारी कर आवेदन मांगता और तीन नाम विवि को सुझाता। इनमें से किसी एक का चयन विवि को करना था।

उग्र आंदोलन की चेतावनी
वरिष्ठ छात्र नेता आदित्य चौहान ने अरुण कुमार सहित विभिन्न नियुक्तियों को गलत ठहराया है। उन्होंने कहा कि वह इसके खिलाफ उग्र आंदोलन करेंगे, क्योंकि तकनीकी विवि के कुलपति प्रदेश विरोधी मानसिकता के हैं, लेकिन प्रदेश के होनहार युवाओं के साथ हो रहे इस छल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उपनल की प्रक्रिया के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। विवि में पहले भी कई गलत भर्तियां हुई हैं। प्रतिनियुक्ति पर पांच साल पूरे करने वालों को भी दोबारा विवि में भेजा जा रहा है। अब यह कुलसचिव कार्यालय ही बता पाएगा कि क्या नियम है और कैसे नियुक्ति होनी चाहिए। 
-प्रो. पीके गर्ग, कुलपति, यूटीयू

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