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सिस्टम में जकड़ी सरकारी विश्वविद्यालयों की ‘आजादी’

Mon, 15 Aug 2016 12:27 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 15 Aug 2016 12:27 PM IST
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government university want freedom
फाइल - फोटो : Getty

आजादी के जश्न के बीच प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालय आज तक आजादी के मोहताज हैं।

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इनकी स्थापना से लेकर आज तक कई-कई बार परिनियमावली बनाकर शासन को भेजी गई लेकिन आज तक यह फाइलें जकड़न से बाहर नहीं निकली। हालात यह हैं कि न तो यह विवि अपने कर्मचारियों की नियुक्ति कर सकते हैं और न ही अधिकारियों का चयन। उपनल के सहारे चल रहे इन विश्वविद्यालयों में प्रदेश के तीन लाख से ऊपर छात्र पढ़ रहे हैं।

आजादी का मुरीद है सबसे पहला उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय। इसकी स्थापना सरकार ने प्रदेश में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2005 में की थी। तब से लेकर आज तक कई कुलपति परिनियमावली की फाइलें शासन में भेजकर इंतजार करते रह गए लेकिन फाइल पास नहीं हुई।
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हालात यह हैं कि यह विवि पद सृजित होने के बावजूद भर्ती नहीं कर सकता। विवि विवि में 60 से अधिक अस्थायी उपनल से भर्ती कर्मचारी परीक्षा सहित तमाम जिम्मेदारी के काम उठा रहे हैं। सरकार ने अप्रैल 2005 में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की।
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11 साल बीत गए लेकिन आज तक विवि की परिनियमावली नहीं बन पाई। अप्रैल 2011 में सरकार ने यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री की स्थापना की। इसकी परिनियमावली न बनने की वजह से यह उपनल की भर्तियों के सहारे चल रहा है।

इसके बाद नवंबर 2011 में श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। इसमें केवल कुलपति ही स्थायी हैं। कुलसचिव, वित्त नियंत्रक सहित तमाम महत्वपूर्ण पद डेपुटेशन से चल रहे हैं। परीक्षा सहित अन्य जिम्मेदारियों को निभाने वाले यहां भी उपनल से भर्ती हुए कर्मचारी ही हैं।

विवि में इस वक्त डेढ़ लाख से ऊपर छात्र और 170 से ऊपर कॉलेज संबद्ध हैं। इसी प्रकार, हेमवती नंदन बहुुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की स्थापना फरवरी 2014 में हुई। यहां कुलपति स्थायी, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक पर डेपुटेशन वाले अधिकारी के अलावा बाकी पूरा स्टाफ उपनल के माध्यम से भर्ती हुआ है।


प्रदेश के मेडिकल, नर्सिंग, पैरामेडिकल सहित तमाम कोर्सेज में इस विवि के पास 50 हजार से ऊपर छात्र और 30 से ऊपर कॉलेज हैं। प्रदेश में उत्तराखंड आयुर्वेद विवि, दून विवि, पंतनगर विवि और कुमाऊं विवि की परिनियमावली बनी हुई है। परिनियमावली न बनने की वजह से विवि आजादी के लिए तरस रहे हैं। कुलपतियों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह लगातार शासन को पत्र भेजते आ रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।

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