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IIT रुड़की: पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी होल्डर हुए1013 छात्र, डिग्री पाकर खिल उठे चेहरे

Mon, 25 Sep 2017 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की Updated Mon, 25 Sep 2017 01:52 AM IST
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convocation ceremony celebration in iit roorkee 

आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह के दूसरे एवं अंतिम दिन 1013 पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इस दौरान समारोह के मुख्य अतिथि एवं राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) के चेयरमैन प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने युवाओं से नई इंजीनियरिंग अवधारणाओं एवं गुणवत्ता आधारित उत्पादों के जरिए देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

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दीक्षांत भवन में आयोजित समारोह में चेयरमैन प्रो. प्रसाद ने कहा कि आईआईटियंस देश में हाउसिंग, खाद्य सुरक्षा और यातायात सुविधाआें जैसे अहम क्षेत्राें में योगदान देकर देश के विकास में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। हम आपसे वह कार्य करने की आशा रखते हैं जो हमसे पहली और हमारी पीढ़ी करने में पूरी तरह विफल रही है।
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उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज पश्चिम के शुद्ध वृद्धि मॉडल दुनिया को गैर स्थिरता की दिशा में ले जा रहा है। अत: विश्व के पास इस ट्रैक को बदलने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा है।
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दुनिया को आज नई दिशा की सख्त जरूरत है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सक्षमता विकसित किया जाना और इसका प्रबंधन हमारी विकास रणनीति का एक अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि आईआईटी स्नातक के रूप में राष्ट्र और विश्व आप से विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने की अपेक्षा रखता है। 

उच्च शिक्षा में गुणवत्ता की उपेक्षा पर जताई चिंता

convocation ceremony celebration in iit roorkee 

इस दौरान संस्थान निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी ने वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। समारोह में 1013 छात्रों को उपाधि प्रदान की गई। डिग्री पाकर छात्र खुशी से झूम उठे। इस दौरान बड़ी संख्या संस्थान प्रोफेसर, छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक मौजूद रहे।

एनबीए चेयरमैन प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की उपेक्षा कर शिक्षण संस्थानों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। कहा कि हाल के वर्षों में आईआईटी, आईआईएम और अन्य उच्च श्रेणी संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। समय-समय पर प्रत्येक संस्था में छात्रों की संख्या में महत्वपूर्ण वृद्धि हो रही है।

वर्ष 2007 में प्रत्येक आईआईटी की क्षमता उस दौरान की सरकार की नीति के हस्तक्षेप के कारण लगभग 50 प्रतिशत बढ़ गई थी। नए आईआईटीज भी खुले। उन्होंने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है और ऐसे निर्णय समय-समय पर वांछित हो सकते हैं। इस दौरान प्रो. सुरेंद्र प्रसाद ने कहा कि आईआईटी में स्पष्ट रूप से कुछ चीजें ठीक से करते हैं।

भले ही मूर्त रूप में यह पहचानना कठिन हो कि ये क्या है। उन्होंने कहा कि आईआईटी यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि हम केवल भीड़ का अनुसरण नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन सिद्धांतों की रक्षा कर रहे हैं जो किसी मानव को विशिष्ट बनाते हैं।

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