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उत्तराखंड में अब किराए की बिल्डिंग में नहीं चलेगा कॉलेज

Sat, 24 Dec 2016 02:45 AM IST
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 24 Dec 2016 02:45 AM IST
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college not allowd in Rental building.
स्टूडेंट - फोटो : Demo pic

प्रदेश में अब किराए की भूमि या बिल्डिंग को लीज पर लेकर कॉलेज नहीं चलाया जा सकेगा। सरकार ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के लिए संबद्धता का अंब्रेला एक्ट लागू कर दिया है। इसका शासनादेश जारी हो गया है। इसके मुताबिक संबद्धता की फाइल में अब शासन का अड़ंगा भी खत्म कर दिया गया है।

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प्रदेश में उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, कुमाऊं विश्वविद्यालय, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय, एचएनबी मेडिकल विवि, उत्तराखंड आयुर्वेद विवि, कॉलेजों को संबद्धता देते हैं। सभी विवि अपने-अपने नियमों के हिसाब से संबद्धता देते आ रहे हैं। इस पर कई बार सवाल भी उठते रहे हैं।
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लिहाजा, राज्यपाल ने सभी कुलपतियों की बैठक में हाल ही में निर्देश दिए थे कि सभी विवि में संबद्धता का कॉमन एक्ट होना चाहिए। इसके मुताबिक कॉमन एक्ट लागू कर दिया गया है। एक्ट में कई नए प्रावधान किए गए हैं। इससे एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी तो दूसरी ओर संबद्धता की प्रक्रिया भी सरल होगी और समय भी बचेगा।  

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यह हैं अहम बदलाव

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student shimla

- मानक पूरे होने पर विवि की ओर से अस्थायी संबद्धता के तहत कम से कम तीन वर्ष या कोर्स की अवधि तक के लिए संबद्धता प्रदान की जाएगी।
- नगर निगम क्षेत्र में कॉलेज खोलने के लिए कम से कम दो एकड़, अन्य क्षेत्र में पांच एकड़ और पर्वतीय क्षेत्र में एक एकड़ भूमि होनी अनिवार्य है।
- यह भूमि, राजस्व भू अभिलेखों में संबद्धता लेने वाले संस्था, कॉलेज या शिक्षण संस्थान के स्वामित्व में दर्ज होने के साथ ही एक ही जगह पर होनी चाहिए।
- महाविद्यालय के पास शैक्षिक, प्रशासनिक और अन्य कार्यों के लिए निजी भवन होना जरूरी है।
- अगर महाविद्यालय कम भवन पर संबद्धता लेकर हर साल छात्र संख्या व कोर्स का ईयर बढ़ने के साथ ही भवन निर्माण नहीं करता है तो उसे स्थायी संबद्धता नहीं दी जाएगी। विवि इसके लिए अधिकतम पांच वर्ष तक का समय दे सकता है।
- मानविकी, विज्ञान और वाणिज्य में कोर्स चलाने के लिए 15 लाख, व्यवसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने को 35 लाख रुपये प्रति पाठ्यक्रम की दर से कोरपस फंड बनाकर उससे रख रखाव का साक्ष्य विवि को सामने प्रस्तुत करना होगा। अभी तक यह राशि वाणिज्य जैसे विषयों के लिए केवल तीन लाख रुपये थी।
- संबद्धता की प्रक्रिया के दौरान अगर किसी संबंधित विभाग की ओर से एक महीने के भीतर उस फाइल का निस्तारण नहीं किया जाता है तो इसे सीधे एनओसी मानकर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाएगी। अभी तक वर्षों तक फाइलें लटकी पड़ी रहती थी।
- नए सरकारी कॉलेज के लिए 10 हजार रुपये, निजी कॉलेज के लिए 50 हजार रुपये प्रक्रिया शुल्क संबद्धता के लिए संबंधित विश्वविद्यालय में जमा कराना होगा।
- संबद्धता की निरीक्षण समिति में कुलपति द्वारा नामित विषय विशेषज्ञ, कुलपति द्वारा नामित विवि के संबंधित संकाय का डीन या समकक्ष, संबंधित विभाग द्वारा जिला स्तर पर नामित उप निदेशक या प्राचार्य स्तर का अधिकारी, लोक निर्माण विभाग द्वारा नामित विभाग का अधिशासी अभियंता शामिल होगा। अभी तक इसमें कई विवि अपने-अपने तरीके से अपनों को सैट करने के लिए बदनाम रहे हैं।
- निरीक्षण की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद विवि को फाइल सीधे राजभवन को भेजनी होगी। इसमें शासन को फाइल भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। अभी तक शासन में फाइल लटकने से भी संबद्धता में देरी होती थी।
- विवि की ओर से सत्र शुरू होने से कम से कम छह महीने पहले आवेदन लेने होंगे। अभी तक तकनीकी विवि सहित कई विवि में कोर्स का एक साल पूरा होने तक भी संबद्धता के आदेश जारी नहीं हो पाते थे।

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